
जबलपुर। भारतीय संस्कृति में तीज त्यौहारों का बड़ा ही महत्व रहा है। लेकिन इस सब के बीच कहीं न कहीं अब आधुनिकता का प्रवेश हो गया है। जिसका खामियाजा प्रकृति को उठाना पड़ रहा है। जैसे कि रासायनिक रंगों से बनने वाली देवी देवताओं की प्रतिमाएं। जिन्हें हम खूब भक्ति भाव के साथ पूजते तो हैं, लेकिन उनका जब तालाबों व नदियों में विसर्जन होता है तो हमारा पुण्य सब बेकार हो जाता है। क्योंकि हानिकारक रंगों से बनी प्रतिमाएं जलीय जीवों के लिए काल बन जाते हैं। इसलिए आज का समय है कि हम दोबारा प्रकृति की ओर लौटें और प्राकृतिक रंगों वाले मिट्टी के भगवान की स्थापना करें।
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घर की माटी सबसे पावन मानी जाती है। यही मिट्टी पूजन में भी प्रयोग की जाती है। इसलिए पत्रिका के प्रयास ईको के फ्रैंड बप्पा के अंतर्गत आज हम बता रहे हैं ५ ईजी स्टेप्स में साधारण मिट्टी से भगवान गजानन की शुद्ध माटी की प्रतिमा। गौरतलब है कि पत्रिका इस गणेशोत्सव में भी अपने स्पेशल कैम्पेन 'ईको के फ्रैंड बप्पाÓ के साथ जागरूकता बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। जो पूरी तरह से ईको फ्रैंडली हैं और महज ५ मिनट में तैयार भी हो जाएंगे। भगवान गणेश की यह प्रतिमा बनाना बता रही हैं रेशम ठाकुर। तो आप भी इस कैम्पेन में शामिल होकर बनाइए ईको के फ्रैंड बप्पा।
सामग्री- साधारण काली या छनी हुई मिट्टी। इसे पानी मिलाकर गूंथ ले। पानी, कलर्स, सजावट के लिए मार्केट में मिलने वाली चीजें। फिनिशिंग के लिए कटर।
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स्टेप 1 - मिट्टी को गूंथ कर कैरी आकार के दो पीस बनाएं। इन्हें एक चौकी पर आगे पीछे जमाकर रखें। ये गणेश जी के पैर होंगे।
स्टेप 2 - अब एक गोल थपकी बनाएं, इसे पैरों के ऊपर अच्छे से चिपकाएं। इसके बाद मिट्टी की चपटी पट्टी बनाकर थपकी के ऊपर रखें।
स्टेप 3 - गणेश जी के वरमुद्रा और लड्डू पकड़े हुए हाथ बनाकर लगाएं। इसके बाद गले के लिए एक गोल पट्टी बनाकर लगाएं।
स्टेप 4 - गोलाकार थपकी लेकर इसमें सूंड, कान लगाकर बनाएं। चेहरे वाले गोल में एक छेद करें, इसे मूर्ति के गले पर फिट कर दें।
स्टेप 5 - मूर्ति को सूखने दें, इसमें आंखें बनाएं। फिनिशिं के बाद गणेशजी में मनचाहे कलर्स, डेकोरेटिव आइटम्स से सजाएं।