व्रत की पूजा विधि
हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को किया जाता है। इस दिन रेत के शंकर-पार्वती बनाए जाते हैं। उनके उपर फूलों का मंडल सजाया जाता है। पूजा गृह को केले के पेड़ों से सजाया जाता है। यह निर्जल, निराहार व्रत है, जिसमें प्रसाद के रूप में फलादि ही चढ़ाए जाते हैं। व्रती स्त्रियां रात्रि जागरण कर, भजन-कीर्तन कर भगवान शिव की पूजा करती हैं। दूसरे दिन भोर होने पर नदी में शिवलिंग और पूजन सामग्री का विसर्जन करने के साथ यह व्रत संपन्न होता है।