
जबलपुर। यूं तो गुरु पूर्णिमा पर गुरु वंदन और पूजन का दौर चल रहा है। शिष्य अपने गुरु की दीर्घायु व स्वास्थ्य की कामना के साथ उनके पास दर्शन पूजन करने पहुंच रहे है। संस्कारधानी जबलपुर में तीन गुरु ऐसे भी हैं जो वर्तमान परिस्थितियों के साथ अपने शिष्यों के भविष्य का चिंतन कर रहे हैं। एक ओर जहां सामान्यत: गुरु अपने शिष्यों को मिठाई फल आदि प्रसाद के रूप में देते हैं। लेकिन ये गुरु अपने शिष्यों पौधों का प्रसाद देकर उन्हें सुखी व स्वस्थ रहने का आशीर्वाद दे रहे हैं। हजारों की संख्या में ये गुरु अपन शिष्यों को पौधों का प्रसाद वितरित कर रहे हैं।
नर्मदा भक्त एवं चिंतक समर्थ भैयाजी सरकार ने इस परंपरा की नींव 8 साल पहले डाली। वे शिष्यों को पौधों का प्रसाद वितरण कर नदी, नालों और प्रकृति संरक्षण संवर्धन का संदेश दे रहे हैं। नर्मदा शुद्धिकरण के लिए उन्होंने 17 महीनों का अनशन भी किया है। आज उन्होंने करीब 4 हजार पौधों का वितरण किया है। इसके पहले चौबीस घंटे का अखंड राम नाप जप समर्थ शिमला हिल्स में हो रहा है जो आज रात तक जारी रहेगा।
परमज्योति का रूप हैं पौधे
ज्योतिषाचार्य एवं देवी साधक डॉ. सत्येन्द्र स्वरूप शास्त्री पिछले 7 सालों से गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पौधों का प्रसाद वितरण कर रहे हैं। प्रत्येक शिष्य को वे संकल्प के साथ बताते हैं कि मां परमज्योति का साक्षात स्वरूप प्रकृति है। जो पेड़ पौधों के रूप में हमारे सामने विद्यमान है। आज उनके द्वारा 701 पौधों का वितरण किया गया।
हर दोष दूर करते हैं पौधे
ज्योतिषाचार्य एवं भागवत भास्कर से प्रसिद्ध सचिनदेव महाराज द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उनके निवास पर आए शिष्यों को आम, नीम, पीपल, अशोक, आंवला, गुलमोहर सहित 351 अन्य देववृक्षों का वितरण किया गया। उनका मानना है कि शास्त्रों में पौधों को देवता कहा गया है। मनुष्य को जितने भी दोष लगते हैं उनका निवारण पौधों की सेवा करने से संभव है। इसमें किसी प्रकार की कोई संशय नहीं है।