
MP High Court: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी महिला और पुरुष के बीच लंबे समय तक, विशेष रूप से करीब दो वर्षों तक लगातार शारीरिक संबंध बने रहे हों, तो यह संबंध सहमति पर आधारित माना जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में परिस्थितियों और दोनों पक्षों के व्यवहार का आकलन करना आवश्यक होता है।
जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि यदि आवेदक ने पीड़ित से विवाह का वादा किया था, लेकिन बाद में उसे पूरा नहीं किया, तो सामान्य परिस्थितियों में पीड़ित का व्यवहार यह होना चाहिए था कि वह ऐसे व्यक्ति से दूरी बना लेती और शारीरिक संबंध आगे जारी नहीं रखती।
अदालत के अनुसार, लंबे समय तक संबंध बनाए रखना इस बात की ओर संकेत करता है कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से थे। इसी आधार पर अदालत ने गोहलपुर थाने में दर्ज दुष्कर्म की एफआईआर को निरस्त कर दिया। यह मामला लंदन निवासी डॉ. जितिन के. सेबेस्टियन से जुड़ा था, जिनके खिलाफ पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई थी।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि वर्ष 2021 में उसकी आवेदक से दोस्ती हुई थी। इसके बाद आवेदक ने उससे विवाह का वादा किया और उसी आधार पर उसके साथ लगातार शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता का यह भी आरोप था कि जब वह गर्भवती हो गई, तब आवेदक अपने वादे से मुकर गया।
इन परिस्थितियों से आहत होकर पीड़िता ने गोहलपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों का अवलोकन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि मामला सहमति का है और दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता।
एक अन्य मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में एक आर्मी ऑफिसर के खिलाफ दर्ज रेप की FIR को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। यह मामला एक महिला पुलिसकर्मी की ओर से दर्ज कराया गया था, जिसमें आरोप था कि ऑफिसर ने शादी का झांसा देकर उससे शारीरिक संबंध बनाए। हालांकि, जस्टिस विनय सर्राफ की सिंगल बेंच ने पाया कि यह मामला आपसी सहमति का है, न कि अपराध का है।