
जबलपुर। कहते हैं जीवन में एक साथी जरूरत उम्र के हर पड़ाव में रहती है। फिर चाहे व युवा अवस्था हो फिर बुजुर्ग की अवस्था। जीवनसाथी का होना बहुत जरूरी है। पुरुष हो या महिला दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। सुख दुख को बांटने से लेकर हर मुसीबत में साथ चलने के लिए जीवनसाथी की जरूरत होती है। एक ऐसा ही मामला जबलपुर में सामने आया है। जहां एक 68 साल के संत ने एक हमउम्र महिला से ब्याह रचाया है। उनका विवाह पूरे कलेक्ट्रेट में चर्चा का विषय बना रहा है। दोनों ही बेटे बहू वाले हैं, लेकिन उन्हें जीवनसाथी बनने में कोई एतराज नहीं हुआ। कानूनी शादी में दोनों के बेटे बहू गवाह बने। खुशी के इन पलों को देखकर वहां मौजूद लोग अपने शब्दों में बयां नहीं कर पा रहे थे।
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कोर्ट मैरिज में बेटा-बहू बने साक्षी
68 के संत और 64 वर्ष की प्रभा ने थामा एक-दूजे का हाथ
नजरें मिलीं और हो गया प्यार...
जीवन साथी को खोने के बाद अकेलेपन की नीरसता से बचने के लिए संत शरण श्रीवास्तव ने एक शॉपिंग मॉल स्थित सीनियर सिटीजन क्लब ज्वाइन कर लिया। इसी तरह प्रभा श्रीवास्तव के पति का भी निधन हो गया था। सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने भी सीनियर सिटीजन क्लब ज्वाइन कर लिया। क्लब में दोनों की मुलाकात हुई। मुलाकात दोस्ती में बदली और वे एक-दूसरे से प्रेम करने लगे। उन्होंने शादी का निर्णय भी किया। लेकिन, उनके मन में संकोच था कि इस उम्र में शादी करने पर दुनिया क्या कहेगी। उन्होंने इस विषय में अपने बच्चों से बात करने का निर्णय किया। दोनों ने अपने बेटा-बहू व परिवार के अन्य सदस्यों से बात की। सभी ने मिलकर उनकी शादी कराने का निर्णय लिया। शुक्रवार को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत अपर कलेक्टर कोर्ट में 68 साल के संत और 64 साल की प्रभा की शादी हुई। इस दौरान दोनों के बेटा-बहू व परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।