Jabalpur Bargi Dam Tragedy:जबलपुर में शिप निर्माण या उसकी उन्नत मरम्मत के लिए कोई विशेषज्ञ कंपनी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर मेंटेनेंस कराए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
Jabalpur Bargi Dam Tragedy: बरगी हादसे में 13 लोगों की मौत का कारण बने क्रूज के मेंटेनेंस और मरम्मत को लेकर जांच के घेरे में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2006 में करीब 80 लाख रुपए में खरीदे गए इस क्रूज पर वर्ष 2024 में 38 लाख रुपए खर्च कर मीडियम रीफीट कराया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि क्रूज पूरी तरह फिट था तो इतनी बड़ी राशि क्यों खर्च की गई, और यदि वह अनफिट हो चुका था तो उसे संचालन से बाहर क्यों नहीं किया गया।
पड़ताल में सामने आया है कि क्रूज के इंजन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की मरम्मत स्थानीय स्तर पर कराई जाती थी। यह भी जानकारी मिली है कि हादसे वाले क्रूज की कुछ मरम्मत करने से हैदराबाद की कंपनी ने इनकार कर दिया था, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर काम कराया गया। हालांकि, इन तथ्यों को लेकर आधिकारिक स्तर पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
जबलपुर में शिप निर्माण या उसकी उन्नत मरम्मत के लिए कोई विशेषज्ञ कंपनी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर मेंटेनेंस कराए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। पर्यटन विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि इंजन का मेंटेनेंस स्थानीय स्तर पर संभव था और इलेक्ट्रिकल कार्य भी यहीं कराया जाता था। वहीं, कुछ मरम्मत कार्य संचालन स्टाफ द्वारा ही किए जाने की बात सामने आई है, जिससे पूरे मेंटेनेंस सिस्टम की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
बरगी क्रूज हादसे की राज्य स्तरीय टीम जांच कर रही है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले ही क्रूज को नष्ट कर करने पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष का कहना है कि दुर्घटनाग्रस्त क्रूज सबसे बड़ा साक्ष्य था, जिसकी तकनीकी जांच जरूरी थी, लेकिन उसे पहले ही नष्ट कर दिया। ऐसे में अब जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष संजय यादव ने कहा कि इसे नष्ट करना साक्ष्य मिटाने जैसा है और स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ऐसा क्यों किया गया। आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष रीतेश सिंह ने कहा कि जांच के दौरान ही साक्ष्य हटाया जाना यह संकेत देता है कि कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने से पहले ही दबा दिए गए।
क्रूज हादसे ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के बावजूद लाइफ जैकेट का उपयोग नहीं हुआ, प्रशिक्षित स्टाफ की कमी रही और खराब मौसम में भी क्रूज संचालन जारी रखा। सूत्रों के अनुसार, क्रूज का एक इंजन खराब होने पर चलाया गया। बोट क्लब प्रबंधन, टिकट काउंटर और तकनीकी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद लापरवाही सामने आई है। सवाल यह भी है कि बोट क्लब मैनेजर की अनुपस्थिति और निगरानी में कमी के बावजूद संचालन क्यों जारी रहा। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इतने स्तरों पर चूक के बावजूद हादसा कैसे हुआ।
बरगी डैम क्रूज हादसे में दिवंगत आयुध निर्माणी खमरिया के कर्मचारी आर. कामराज और उनके पुत्र तमिल के शव को त्रिचनापल्ली भेजना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। रविवार शाम को दोनों शवों को भेजने के लिए कार्गो विमान तैयार था, लेकिन खराब मौसम होने से डुमना एयरपोर्ट से उड़ान नहीं भर पाई। विमान को जबलपुर में रोकना पड़ा। सोमवार को जब शव विमान में रखे जा रहे थे, तब पायलट ने बदबू के कारण उड़ान भरने में असहजता जताई। बताया जाता है कि हादसे के पांच दिन बाद शव डी-क्पोज हो चुके थे, जिससे तेज गंध आ रही थी। छोटे विमान में पायलट और कार्गो के लिए अलग केबिन नहीं होने से समस्या और बढ़ गई।
अधिकारियों ने पायलट से चर्चा कर शवों पर विशेष स्प्रे कराया। इसके बाद करीब एक घंटे की देरी से विमान को सोमवार सुबह करीब 8 बजे त्रिचनापल्ली के लिए रवाना किया। करीब साढ़े तीन घंटे में शवों को उनके गृहग्राम पहुंचाया गया।