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‘बार-बार नाम-पता पूछा गया, पैसे नहीं थे तो…’, जबलपुर क्रूज हादसे में चौंकाने वाला खुलासा

Jabalpur Tragedy: जख्मों पर इंजेक्शन, हाथ में बिल... बनारस से भाई से मंगाए पैसे, परिजन बोले- यह हादसा नहीं, हत्या है...बरगी क्रूज हादसे में मृतक के परिजनों ने लगाए आरोप।

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shocking revelation in Jabalpur Tragedy Bargi cruise accident

Shocking revelation in Jabalpur Tragedy Bargi cruise accident (Source: Patrika File Photo)

Jabalpur Tragedy: जबलपुर बरगी क्रूज हादसे में 13 जिंदगियों के खत्म होने के बाद अब सवाल सिर्फ हादसे तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता पर खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर परिजन इसे पर्यटन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही बताते हुए हत्या बताते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं हादसे में बची महिला ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि अस्पताल में प्राथमिक इलाज से पहले उनसे बार-बार नाम-पता पूछा गया और बाद में मामूली उपचार के बदले हजारों रुपए वसूल लिए गए।

यह हादसा नहीं हत्या है, अधिकारियों पर दर्ज हो FIR

बरगी क्रूज हादसे में कामराज, उसके बेटे तमिल और भतीजे मयूरम के शव मिलने के बाद रविवार को परिजन का आक्रोश फूट पड़ा। परिजन ने घटना को हादसा मानने से इनकार करते हुए इसे "हत्या" करार दिया और कहा कि तीन दिन बीतने के बाद भी न तो किसी की गिरफ्तारी हुई है और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई की गई है। परिवार का आरोप है कि इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश पर्यटन निगम (एमपीटी) की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, लेकिन उनकी पीड़ा न प्रशासन तक पहुंची और न ही संबंधित अधिकारियों तक। बच्चों की मौत ने पूरे परिवार को बिखेर दिया है।

इंजेक्शन लगाकर थमा दिया बिल, पैसे नहीं थे तो भाई से मंगाया

हादसे(Jabalpur Tragedy Bargi Dam Cruise Accident) में बची सविता शर्मा ने शहर की स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी उन्हें तत्काल और समुचित मदद नहीं मिल सकी। अस्पताल पहुंचने पर इलाज से पहले बार-बार नाम-पता पूछा जाता रहा, जबकि प्राथमिक उपचार में देरी हुई।

फोन से लेकर सब खराब हो चुका था....पैसे भी नहीं थे

उन्होंने बताया कि उन्हें और उनके साथ मौजूद तीन अन्य लोगों को एक अस्पताल ले जाया गया, जहां केवल दर्द निवारक और टिटनेस का इंजेक्शन दिया गया, इसके बावजूद 4700 रुपए का बिल थमा दिया गया। उन्होने बताया कि, फोन से लेकर सब खराब हो चुका था। पैसे भी नहीं थे। हमने सारी बात बताई, फिर भी बिल दे दिया गया। इस दौरान मौजूद अधिकारी कर्मचारियों ने भी कोई मदद नहीं की। उन्होंने बनारस में रहने वाले अपने भाई को फोन कर अस्पताल के खाते में पैसे डलवाए। बताया जा रहा है कि महिला गौर तिराहा ​स्थित नोबल अस्पताल इलाज के लिए पहुंची थी।