अपराध की दुनिया से बाहर लाने बच्चों को जोड़ रहे कला, शिक्षा और योग से
juvenile justice board : वे जाने अनजाने में अपराध की दुनिया में कदम रख देते हैं। जबकि वे उनकी सोच अब भी बालमन जैसी होती है। किशोरावस्था में भी वे घातक कदम नहीं उठाना चाहते लेकिन कई बार हालातों के चलते वे अपराध की दुनिया से रूबरू हो ही जाते हैं। ऐसे में उन्हें दोबारा समाज की मुख्य धारा से जोडऩे और अपराध की दुनिया से दूर करने के लिए कला, शिक्षा और आध्यात्म का रास्ते पर ले जाना एक बेहतर कदम है। कुछ ऐसी ही पहल बाल संप्रेक्षण गृह द्वारा की जा रही है। जिसके परिणाम स्वरूप बहुत से किशोर आज बेहतर जीवन जी रहे हैं।
संप्रेक्षण गृह में आए किशोरों को समाज की मुख्य धारा से जोडऩे के लिए प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड रुचि गोलस सगर के मार्गदर्शन में कई तरह की विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें योग एवं ध्यान, वायईएस कोर्स, सुदर्शन क्रिया, आध्यात्मिक शिक्षा, औपचारिक शिक्षा, सिलाई प्रशिक्षण, कंप्यूटर प्रशिक्षण, आर्ट एंड क्राफ्ट, एवं मोटिवेशनल कार्यक्रम शामिल हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से संप्रेक्षण गृह के बच्चे व किशोरों में आत्मविश्वास, कौशल विकास, नैतिक मूल्यों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे वे भविष्य में सफल और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
संप्रेक्षण गृह में हर विधा का एक एक एक्सपर्ट रखा गया है। जो किशोरों को प्रतिदिन उनकी रुचि के अनुसार प्रशिक्षण देते हैं। यहां योग एवं ध्यान क्लास योग गुरु महेन्द्र, आध्यात्मिक शिक्षा रविन्द्र चौबे, किताबी शिक्षा सत्यनारायण द्विवेदी, विनोद सिंह, सिलाई प्रशिक्षण आबिद सर, कंप्यूटर प्रशिक्षण नूरुद्दीन सर, आर्ट एंड क्राफ्ट प्रशिक्षण सोनिया लखेरा, मोटिवेशनल प्रोग्राम सचिन मेहरा द्वारा दिया जाता है।
संस्था के पुनर्वासित होने के बाद घर लौटे किशोरों व बच्चों का नियमित फॉलोअप भी लिया जा रहा है। ताकि वे अपराध की दुनिया के करीब भी न जा सकें। इसके साथ ही जिन स्कूलों में वे पढऩे जाते हैं तथा उनके घर परिवार व समाज के व्यवहार पर निगरानी रखने के लिए भी सीएसए स्टाफ द्वारा लगातार निगरानी रखी जाती है। यदि कहीं कोई परिवर्तन नजर आता है तो उसका सुधार किया जाता है।
juvenile justice board : किशोर न्याय बोर्ड में आने वाले बच्चों व किशोरों को समाज की मुख्य धारा एवं स्वरोजगार से जोडऩे के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। जिसके फलस्वरूप वे स्वप्रेरित होकर सभी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं और संस्था से जाने के पश्चात् भी उन्हें प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। ताकि वे अपना भविष्य संवार कर देशहित में काम कर सकें।