यहां बसी हैं राजकपूर की पत्नी कृष्णा की यादें
जबलपुर। कपूर खानदान की बहू और संस्कारधानी की बेटी कृष्णा कपूर का सोमवार को निधन हो गया। यह खबर निश्चित ही दुखद है। कृष्णा के जाते ही जबलपुर और कपूर फैमिली का एकमात्र संपर्क भी टूट गया। जानकार बताते हैं कि कृष्णा का बचपन जबलपुर में भी बीता। यहां से उनकी कई मीठी यादें जुड़ी हुई हैं। यही वजह है कि जबलपुर का नाम आते ही कृष्णा कपूर का चेहरा खिल उठता था।
मायके आती थीं कृष्णा
जानकारों के अनुसार स्व. प्रेमनाथ की बहन कृष्णा का विवाह स्व. राज कपूर से हुआ था। कृष्णा ने अपने पति राज कपूर और भाई प्रेमनाथ के जाने के बाद दोनों ही परिवार को संभाला। शादी के बाद उनका अपने मायके जबलपुर आना जाना होता रहता था। वे भावात्मक तौर पर अब तक भी जबलपुर से जुड़ी रहीं। कृष्णा कपूर को व्यक्तिगत रूप से जानने-पहचानने वालों का कहना है कि उनके जाने से संस्कारधानी और कपूर फैमिली को जोडऩे वाली आखिरी कड़ी भी अब टूट गई है।
शहर के लिए था अपनापन
राज कपूर और कृष्णा का विवाह रीवा में १९४६ में हुआ था। दोनों ही परिवार में बहुत अच्छे संपर्क रहे। इसी वजह से राज और प्रेमनाथ के बीच अच्छे संपर्क होने की वजह से जबलपुर का नाता फिल्मी दुनिया से जुड़ा रहा। शहर के हास्य कलाकार राजेश मिश्रा ने बताया कि कृष्णा कपूर के दिल में जबलपुर के बहुत प्यार और अपनापन था। उनकी एक-दो बार कृष्णा कपूर से मुलाकात भी हुई थीं। जबलपुर का नाम सुनते ही उनकी आंखों में चमक आ जाती थी।
बच्चों को दिए संस्कार
जानकार पंकज स्वामी बताते हैं कि उनके नाना बीएल पाराशर का प्रेमनाथ परिवार से संपर्क था। इस वजह से पाराशर भी कृष्णा कपूर से परिचित थे। पाराशर द्वारा पंकज को सुनाए गए संस्मरणों के आधार पर कृष्णा ने अपने बच्चों को सांस्कृतिक और पारिवारिक संस्कार दिए थे। वे यहां बच्चों के साथ आती थीं। रणधीर और ऋषि कपूर को बचपन में ही शेक्सपियर के नाटक रोमियो-जूलियट कंठस्थ थे।
भाई को किया सपोर्ट
जानकारों की मानें तो प्रेमनाथ के अभिनेता कॅरियर के दौरान खराब समय में बहन कृष्णा कपूर ने मनोवैज्ञानिक सपोर्ट दिया। उनकी मदद से ही वे एक बार फिर उठ खड़े हुए। प्रेमनाथ ने फिल्म जगत में ऐसी छाप छोड़ी जो सदैव अमिट रहेगी। जबलपुर में एम्पायर थियेटर के समीप प्रेमनाथ का बंगला तो है ही, ग्वारीघाट में जिलहरीघाट के समीप वह स्थान भी है, जहां प्रेमनाथ फुरसत के पल बिताया करते थे।