यहां खेतों का ‘सोना’ बना किसानों की मौत कारण, डरने लगी है नई पीढ़ी

भारत को गांवों का देश ही कहा जाता है यहां किसान खेतों में फसल नहीं सोना लगाते हैं, लेकिन इन दिनों ये सोना ही उनकी मौत का कारण बन रहा है।

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Oct 26, 2015
farmer
जबलपुर। भारत को गांवों का देश ही कहा जाता है यहां किसान खेतों में फसल नहीं सोना लगाते हैं, लेकिन इन दिनों ये सोना ही उनकी मौत का कारण बन रहा है। प्रदेश में बीते कुछ माह में हुई घटनाओं को देखकर अब नई पीढ़ी अपने पूर्वजों के इस काम को करने में डरने लगी है। कई ऐसे भी घर देखने मिल रहे हैं जहां किसान खेती बाड़ी छोड़कर शहर मजदूरी करने निकल रहे हैं।

पानी की कमी और बिजली

लगातार हो रही घटनाओं का एक कारण पानी की कमी और बिजली का संकट बताया जा रहा है। पीला मोजेक लगने के बाद फसलें बुरी तरह प्रभावित हुईं। वहीं जो बची थीं उसे बिजली, पानी के संकट ने पूरा कर दिया। बार-बार मांग के बाद भी किसानों की इस समस्या को दूर नहीं किया गया।
उम्मीदों की रोशनी

रबी फसलों की बुआई का सीजन शुरू हो गया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हाल में जारी बूंदाबांदी और बदले मौसम का फायदा किसानों को मिल सकता है। मिट्टी गीली होने से इसका लाभ सीधे फसलों को मिलेगा।

इस समय पाकिस्तान के ऊपर पश्चिमी विक्षोभ है, जिसके कारण राजस्थान के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवात बना हुआ है, साथ ही जम्मू कश्मीर में भी बर्फबारी हो रही है। इसके अलावा अरब सागर के ऊपर से द्रोणिका गुजर रही है। जिसके कारण नमी प्रदेश में आ रही है।
मावठे की बारिश होने से आगामी फसल में अच्छा फायदा होगा। बिजली और पानी की बड़ी मात्रा में बचत होगी। सोयाबीन की फसल कटने के बाद अब खेत खाली है, जिसके चलते मावठे से बहुत फायदा है, अब खेतों में बिना पानी दिए ही बुआई हो सकेगी। लेकिन आगामी दिनों और बारिश होगी तो जिन किसानों के पास पानी का पर्याप्त साधन नहीं है, वो भी अपना खेत बो सकेंगे।

मिले पर्याप्त बिजली

पत्रिका एग्रो क्लब के सदस्य केके अग्रवाल, रामगोपाल पटेल, रमेश पटेल का कहना है कि फसलें चौपट होने से बैंकों से लिए कर्जे में डूबा है। सरकार को किसानों के बैंक के सभी कर्जों, बिजली बिलों को तुरंत माफ करना चाहिए। रबी सीजन की फसल किसान सही ढंग से कर सके इसके लिए सिंचाई के पुख्ता इंतजाम में थ्री फेज बिजली आपूर्ति, नहरों में पर्याप्त पानी के पुख्ता इंतजाम कराना चाहिए। किसानों को सब्सिडी पर खाद, बीज मुहैया कराने के साथ धान की खरीदी पर बोनस देना चाहिए।
अब तक हुई घटनाएं

- 29 मई को दमोह जिले के रूप सींग ने आत्महत्या की। सात दिन बाद उसके छोटे भाई वीरन सींग ने भी खुदकुशी की।
-19 सितंबर को सिहोरा तहसील के फनवानी गांव के किसान रामकृपाल पटेल ने फांसी लगाकर जान दी।
- 22 सितंबर को जबलपुर मझौली तहसील लमकना में किसान देवेंद्र पटेल के सीने में दर्द उठा और उसकी मौत हो गई।
- 25 सितंबर जबलपुर की मझौली तहसील ग्राम हरसिंघी में किसान प्रेमलाल पटेल (72) और रीछी के भैय्या जी पटेल (62) की अटैक आने से मौत।
- 12 अक्टूबर को पथरिया के मिर्जापुर गांव के किसान मुकेश पटेल ने जहरीली दवा पीकर खुदकुशी का प्रयास किया।
- 14 अक्टूबर को केरबना निवासी अशोक रानी अहिरवार ने जहर का सेवन किया था जिसकी इलाज के दौरान जबलपुर में मौत हो गई।
- 23 अक्टूबर को दमोह जिले के पथरिया में कृषक ललन यादव ने आग लगाकर खुदकुशी कर ली।
- 24 अक्टूबर को दमोह पथरिया की महिला किसान द्रोपदी बाई ने जहरीली वस्तु का सेवन कर लिया।
Published on:
26 Oct 2015 05:57 pm
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