
जबलपुर। मर्यादा पुरु षोत्तम श्रीराम देश, धर्म से ऊ पर विश्व के आदर्श हैं। उन्हें सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। प्रेम, त्याग, तपस्या की प्रतिमूर्ति, प्रजा के श्रेष्ठ पालक, आदर्श बेटा, भाई, पति के रूप में श्रीराम का अनुशरण कर श्रेष्ठ जीवन जीया जा सकता है। दुनियाभर से आए हिन्दू, मुस्लिम, क्रिश्चिन अध्येताओं व शोधार्थियों ने वल्र्ड रामायण कांफ्रें स के मंच से ये संदेश दिया। मानस भवन में आयोजन के दूसरे विषय मर्मज्ञों ने संस्कारधानी की धरा से विश्व बंधुत्व का पैगाम देते हुए कहा कि भारतीय मनीषियों का संचित ज्ञान दुनियाभर के लिए प्रकाशपुंज है, जो विश्व कल्याण और शांति की प्रार्थना करता है।
तप कर कुं दन बने राम-
राम के जीवन से सीख ली जा सकती है कि वे मर्यादा पुरुषोत्तम कैसे बने। दरअसल तप कर ही कुं दन बना जा सकता है। ये बात प्रो. सुखदेव सिंह मिनास ने कही। डॉ. नरेन्द्र कोष्टी ने राम राज्य में जीडीपी पर बात रखते हुए कहा कि उनके राज्य में समृद्धता थी।
वासना ही समस्याओं की जड़-
अमेरिका से आए प्रो. बलराम ने कहा कि बलात्कार, कन्या भ्रूण हत्या सबकी जड़ वासना ही है। सीता और सूर्पनखा के चरित्र में मुख्य अंतर भी यही है। सीता सर्वजन हिताय क ी भावना रखती हैं, जबकि सूपर्णखा दूसरों के नाश का भाव मन में रखती है।
अयोध्या में था राम मंदिर-
अयोध्या में राम मंदिर था, इस बात का प्रमाण वहां खुदाई में मिला प्रत्येक पत्थर स्वयं देता है। उक्त बात ऑर्कियोलॉजिस्ट केके मोहम्मद ने कही। उन्होंने न्यायालय के निर्देश पर अयोध्या में सर्वे किया था और अपनी रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट को आधार मानकर सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय दिया था। रिटायर्ड मेजर जनरल रिटायर्ड जीडी बख्शी ने रामायण में युद्ध कौशल विषय पर व्याख्यान दिया।
हरि कथा अनंता-
मॉरीशस से आए राजेन्द्र अरुण ने शिव शम्भु-उमा सम्वाद के माध्यम से अपनी बात रखी। दक्षिण अफ्र ीका की बोस्टवाना हिन्दू सोसायटी से आए केसी जैन ने आश्रम परम्परा में रामायण पर अपना शोध प्रस्तुत किया और करीब 80 से ज्यादा पुस्तकों पर अपनी बात रखी। डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने राजा भोज की चम्पू रामायण पर बात रखी। लखनऊ से वाईपी सिंह ने राम की विश्व यात्रा पर प्रमाण दिए। वेस्ट इंडीज की डॉ. इंद्राणी रामप्रसाद ने बताया कि राम और रामायण विविध रूपों में दुनिया में मान्य हैं। थाईलैंड की अनिता बोस ने दक्षिण पूर्व एशिया में रामायण की मौजूदगी के कई रोचक तथ्य बताए।
रामायण का स्वरूप व्यापक-
मीनाक्षी शरन ने समूचे विश्व में रामायण के व्यापक स्वरूप पर अपनी बात रखी। अमेरिका से आए स्टीफ न नैप ने पॉवर ऑफ रामायण पर व्याख्यान दिया। मुम्बई की स्नेहा नागरकर ने भगवान राम की ओर से राजा भरत को दिए राज्य शासन सम्बंधी दिशा-निर्देशों पर बात रखी। आंध्र प्रदेश के डॉ. हरिराम प्रसाद ने लोक साहित्य में रामकथा विषय पर जानकारी दी।
काव्य और नाटक में उतरी रामायण-
कवि अक्षर, अमन व गुनवीर सिंह राणा ने रामायण पर प्रस्तुति दीं। निर्देशक संजय उपाध्याय ने रामायण की रचना और कवि गोस्वामी तुलसीदास के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। मणिपुरी रामलीला डावाई गोगन इम्फ ाल के कलाकारों ने लव कुश पर प्रस्तुति दी। थाईलैंड की डॉ. पी नरीरत ने स्वर्ण हरिण और मारीच की नृत्य प्रस्तुति ने सबका दिल जीत लिया। डॉ. अखिलेश गुमाश्ता ने सॉफ्ट पॉवर ऑफ रामायण पर विस्तार से बात की।
सॉविनियर विमोचन के साथ शुभारंभ
26 जनवरी को द्वितीय वल्र्ड रामायण कांफ्रेंस का शुभारम्भ हुआ। कांफ्रेंस की सॉविनियर स्मारिका का विमोचन हुआ। मुख्य अतिथि केन्द्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि संकल्प से सब कुछ सम्भव है और वल्र्ड रामायण कांफ्रेंस ऐसे ही एक संकल्प का जीवंत परिणाम है। कार्यक्रम में साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी, महापौर स्वाति गोडबोले, विधायक अजय विश्नोई, अशोक रोहाणी, विनय सक्सेना, डॉ. अखिलेश गुमाश्ता, अशोक मनोध्याय, रवींद्र वाजपेयी, कमल ग्रोवर, श्याम साहनी, विंध्येश भापकर, अमरेंद्र नारायण, आदित्य मिश्रा, शिशिर अग्रवाल, संजय यादव, डॉ. नीना उपाध्याय, पवित्र मिश्रा शामिल हुए।