जबलपुर

doctor बनने के लिए बदल लिए मां-बाप-भाई बहन

गोदनामा प्रस्तुत कर प्रवेश लेने वाले 5 कॉलेजों के 111 छात्र-छात्राओं के दस्तावेज अधूरे, एनआरआई कोटे में प्रवेश पर जवाब नहीं दे पा रहे कॉलेज

2 min read
Nov 16, 2017
Medical University recommends action from DME
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जबलपुर . किसी के चाचा, भाई, बहन और चचेरे भाई विदेश में हैं तो कुछ लोगों को अनिवासी भारतीयों ने गोद ले रखा है। इस आधार पर गोदनामा प्रस्तुत करके राज्य के निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में एनआरआई कोटे में दाखिला की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। अब मेडिकल यूनिवर्सिटी की सख्ती के बाद एनआरआई कोटे की गाइड लाइन के अनुसार प्रवेश सम्बन्धी पात्रता साबित करने में कॉलेजों को जवाब नहीं सूझ रहा है। मेडिकल यूनिवर्सिटी ने नामांकन से पूर्व जांच की तो एमबीबीएस, बीडीएस, एमडी एमएस में प्रवेश में खेल का खुलासा हुआ। पांच कॉलेजों ने १११ छात्र-छात्राओं के दस्तावेज जांच के लिए भेजे गए। वे एनआरआई छात्र होने की शर्तें पूरी नहीं कर सके। जिन कॉलेजों ने जवाब नहीं भेजा है, उन्हें संदिग्ध माना जा रहा है।


एेसे हुई कार्रवाई
एक आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत पर मेडिकल यूनिवर्सिटी ने ३ अक्टूबर को कॉलेजों को नोटिस भेजकर दस्तावेज मांगे। १ नवम्बर को डीएमई से छात्रों की सूची मांगी गई और उसके बाद डीएमई, एमसीआई और डीसीआई को पत्र भेजकर एनआरआई की शर्तें मांगी गई। मेडिकल यूनिवर्सिटी ने १८ अक्टूबर को आखिरी तिथि निर्धारित कर दस्तावेज मांगे थे लेकिन ज्यादातर कॉलेजों ने जवाब नहीं भेजा।


- एनआरआई कोटे में गोद लेना और किसी रिश्तेदार के अनिवासी होने पर पात्रता नहीं हो सकती है। डीएमआई, एमसीआई और डीसीआई को आर्हता और आवश्यक कार्यवाही के लिए जानकारी भेजी गई है।
डॉ.आरएस शर्मा, कुलपति

कॉलेज को साबित करनी है आर्हता
एडवांस इंस्टीयूट ऑफ मेडिकल साइंस भोपाल, अमलतास मेडिकल कॉलेज देवास, चिरायु मेडिकल कॉलेज भोपाल, मॉडर्न इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल इन्दौर, आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज इन्दौर, अरिवन्दो मेडिकल कॉलेज इन्दौर एवं सुख सागर मेडिकल कॉलेज जबलपुर, इंडेक्स डेंटल कॉलेज इन्दौर, ऋषिराज डेंटल कॉलेज भोपाल, भाभा डेंटल कॉलेज भोपाल, महाराणा प्रताप डेंटल कॉलेज ग्वालियर, गुरु गोविन्द सिंह डेंटल कॉलेज भोपाल, मानसरोवर डेंटल कॉलेज भोपाल को आर्हता साबित करनी है।


गाइड लाइन की शर्तें
वर्ष २०१६-१७ के राजपत्र के अनुसार एेसे अभ्यर्थी जिनके द्वारा विदेश में शिक्षा प्राप्त की गई है, विदेश मंत्रालय द्वारा अनुमोदित होने के आधार पर वे पात्र होंगे। जबकि वर्ष २०१७ की गाइडलाइन के अनुसार अभ्यर्थी को स्वयं अनिवासी भारतीय होना चाहिए।

Published on:
16 Nov 2017 09:33 am