
जबलपुर. जिले में बढ़ते महिला अपराधों के बीच अब बच्चों को भी निशाना बनाया जा रहा है। हर तीसरे दिन एक नाबालिग या तो यौन उत्पीडऩ का शिकार हो रही है या फिर छेड़छाड़ या अगवा हो रही है। जनवरी से अब तक आधा दजज़्न ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें आरोपित सगा या सौतेला पिता था। अब तक एक बालिका की हत्या और हत्या के प्रयास के आठ मामले सामने आ चुके हैं।
news fact- जिले में तेजी से बढ़े अपराध, यौन उत्पीडऩ के मामले बढ़े, अब बच्चियां भी नहीं सुरक्षित
जिले में बच्चों पर हो रहे अपराधों में सबसे अधिक यौन उत्पीडऩ के मामले सामने आ रहे हैं। 17 जून को कुंडम थाना क्षेत्र अंतर्गत ससुराल गए 45 साल के व्यक्ति ने 10 साल की बालिका से दुराचार किया। बालिका के पड़ोस में ही आरोपित की ससुराल है। बालिका के परिजन मजदूरी करने गए थे। आरोपित ने पांच रुपए देने के बहाने बालिका को बुलाया था।
ये हैं आंकड़े
हत्या - 01
दुष्कर्म - 42
छेड़छाड़- 62
हत्या का प्रयास- 08
अपहरण- 128
केस-1
19 मार्च 2018 को आधारताल थाना क्षेत्र के बजरंगबाड़ा में 13 साल की किशोरी का गला रेत कर हत्या कर दी गई। आरोपित किशोरी की मां का प्रेमी निकला। उसकी नजर किशोरी पर भी थी।
केस 2-
27 मार्च 2018 को पनागर थाना क्षेत्र में 40 वषीज़्य पिता ने आठ साल की बेटी से दुराचार किया। जानकारी मिलने पर उसकी मां ने शिकायत दर्ज कराई।
केस 3-
पांच फरवरी 2018 को रांझी थाना क्षेत्र में फैक्ट्री के खंडहर हो चुके क्वार्टर में आठ युवकों ने 16 वर्षीय किशोरी से दुराचार किया। उनकी मंशा किशोरी की हत्या करने की थी, तभी पुलिस पहुंच गई।
एक जनवरी 2018 से अब तक नाबालिगों से दुराचार के 42 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 17 मामलों में पीडि़त की आयु 10 साल से कम है। आठ जून को खमरिया थाना क्षेत्र में नौ और 11 साल की दो बालिकाओं ने आपबीती सुनाई तो उनके माता-पिता सन्न रह गए। दोनों के साथ पड़ोस के युवकों ने 14 दिनों तक दुष्कर्म किया था।
लापता होने वालों में भी नाबालिग अधिक
जिले से लापता होने वालों में भी नाबालिगों की संख्या अधिक है। जनवरी से 10 जून तक 648 प्रकरणों में 201 नाबालिगों के हैं। इसमें 127 लड़कियां हैं। इन सभी को बहला-फुसला कर अपहरण किया गया है। इनमें से सिर्फ पांच को ही पुलिस ढूढ़ सकी है।
बाल अपराधों में बढ़ोतरी का कारण सामाजिक है। अपहरण के मामले की निगरानी क्राइम ब्रांच करता है। कई मामलों में बच्चे लौट आते हैं, लेकिन उनके परिजन सूचना नहीं देते, इससे सही कारण सामने नहीं आ पाते।
- संदीप मिश्रा, एएसपी क्राइम