कोर्ट ने पुलिस और डॉक्टर्स की कार्यशैली पर उठाए सवाल, दो हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने के दिए निर्देश
जबलपुर। भोपाल गैंगरेप मामले में हाईकोर्ट में सोमवार से सुनवाई हुई। पुलिस द्वारा पीडि़ता की रिपोर्ट लिखने में देरी और मेडिकल रिपोर्ट में सहमति से शारीरिक संबंध बनाए जाने का उल्लेख आने के बाद हाईकोर्ट ने मामले को स्वत: संज्ञान में लिया था। इस मामले में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से घटना के बाद की गई कार्रवाई की जानकारी दी गई। सरकार के जवाब पर हाईकोर्ट असंतोष जताते हुए जमकर फटकार लगाई। पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पीडि़ता की मेडिकल रिपोर्ट बनाने वाले डॉक्टर्स के रवैये को लेकर भी आश्चर्य जताया। कोर्ट ने मामले पर टिप्पणी करते हुए मामले को इट्स अ ट्रेजेडी ऑफ एरर्स बताया। साथ ही दो सप्ताह में सरकार को पूरी रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए है।
दूसरी मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि
भोपाल गैंगरेप पीडि़ता का पहला मेडिकल परीक्षण सुल्तानिया अस्पताल में किया गया था। वहां पर जिस महिला डॉक्टर ने पीडि़ता का चेकअप किया था, उसने अपनी रिपोर्ट में गैंगरेप के बजाय आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाने की बात का जिक्र किया था। इसे लेकर बवाल हो गया। उसके बाद पीडि़ता का दूसरी बार मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें गैंगरेप की पुष्टि हुई है। दूसरी रिपोर्ट में चार आरोपियों द्वारा रेप किए जाने की बात कही गई है। मामले में हंगामा हुआ तो सुल्तानिया अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर करण पीपरे ने सफाई दी कि ये लिखने में गलती हुई है, जिससे अर्थ का अनर्थ हो गया है।
पुलिस के लिए चलाए प्रशिक्षण कार्यक्रम
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सोमवार को सरकार की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर कहा कि सरकार ने दबाव में आकर पुलिस कर्मियों को दंडित किया है। हाईकोर्ट ने सरकार की रिपोर्ट पर नाखुशी जताते हुए कहा कि सरकार बताए पीडि़ता आखिर क्यों परेशान हुई। कोर्ट ने इस मामले का हवाला देते हुए पुलिस कर्मियों के जागरूकता के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने की जरुरत भी बताया है।
हबीबगंज आरपीएफ चौकी के पास की घटना
भोपाल आरपीएफ में पदस्थ एएसआई की बेटी के साथ चार आरोपियों ने 31 अक्टूबर की देर शाम गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। घटना हबीबगंज आरपीएफ चौकी के पास हुई थी। पीडि़ता ने परिजनों के साथ खुद एक आरोपी को पकड़ा और पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने गैंगरेप के करीब 24 घंटे बाद केस दर्ज किया था। इसके बाद जीआरपी ने फरार चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
दो डॉक्टर को नोटिस
इसके बाद चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य राज्यमंत्री शरद जैन ने कहा था कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ जांच की जाएग. वहीं कमिश्नर ने दो डॉक्टरों को शोकॉज नोटिस जारी किए थे. इससे पहले शुक्रवार को डीजीपी ऋषिकुमार शुक्ला ने एसआईटी को इसकी रिपोर्ट जल्द से जल्द पेश करने के लिए कहा था।
मुख्य सचिव से लेकर डीजीपी, आईजी तक पक्षकार
गैंगरेप मामले की रिपोर्ट लिखने में देरी और जांच में लापरवाही पर हाईकोर्ट ने मामले को स्वत: संज्ञान में लिया है। कोर्ट ने केस दर्ज कर मुख्य सचिव, डीजीपी और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के खिलाफ नोटिस जारी किया था। इस मामले में कोर्ट ने सरकार समेत आधे दर्जन जिम्मेदार विभागों के प्रमुखों को पक्षकार बनाया है। याचिका में मुख्य सचिव, गृह सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव, डीजीपी, भोपाल आईजी को भी पक्षकार बनाया गया है।