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जबलपुर। जैन धर्म के तीर्थ दमोह जिले के कुंडलपुर में स्थित भगवान महावीर (बड़े बाबा ) का एेतिहासिक मंदिर है। यह मंदिर बुंदेलखंड के राजा छत्रसाल के समय का निर्मित है। इस मंदिर के नवनिर्माण का मामला कई दिनों से अदालत में लंबित था। लेकिन मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद मंदिर नवनिर्माण की राह का आखिरी रोड़ा भी अलग हो गया है। मप्र हाईकोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल बेंच के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें निर्माणाधीन मंदिर स्थल वन भूमि में होने के चलते रोक लगा दी गई थी। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने जयपुर की संस्था जैन संस्कृति रक्षा मंच के अध्यक्ष मिलाप चंद डांडिया पर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के लिए एक लाख रुपए कॉस्ट भी लगाई है।
यह है मामला
प्रकरण के अनुसार जैनों के प्रमुख तीर्थस्थल कुंडलपुर में स्थित भगवान महावीर (बड़े बाबा ) का एेतिहासिक मंदिर है। यह मंदिर बुंदेलखंड के राजा छत्रसाल के समय का निर्मित है। मंदिर का गर्भगृह जमीन के नीचे था। साथ ही गर्भगृह में स्थापित बड़े बाबा सहित अन्य देवी-देवताआें की प्रतिमाएं कतारबद्ध एक ही पत्थर की दीवार पर थीं। ये जिस पत्थर से निर्मित थीं, वह क्षरणीय था। लिहाजा मंदिर के संचालक श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कुंडलपुर पब्लिक ट्रस्ट ने इस मंदिर का पुननिर्माण करने का फैसला लिया। पुराने मंदिर से कुछ दूरी पर नये मंदिर का निर्माण करने का प्रस्ताव लाया गया। बड़े बाबा की प्रतिमा को भी अन्य प्रतिमाओं से अलग कर नये मंदिर में स्थापित किया गया। राज्य सरकार ने भी 2014 में इस निर्माण कार्य को कुछ शर्तोंं के साथ अनुमति दी।
सुको में राज्य सरकार के आदेश को चुनौती
जैनों की जयपुर स्थित मुख्यालय वाले जैन संस्कृति रक्षा मंच ने राज्य सरकार के इस आदेश को सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। मंदिर को पुरातात्विक महत्व का निरुपित करते हुए मंच ने सुको में कहा कि यहां कोई निर्माण नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुरातत्व विभाग ने मंदिर नवनिर्माण के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें ये सभी बिंदु समाहित हैं। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि मंच बार-बार इस मसले कों कोर्ट मे न घसीटे।
हाईकोर्ट ने भी की निरस्त
अतिरिक्त महाधिवक्ता समदर्शी तिवारी (एएजी )ने कोर्ट को बताया कि इसके बाद रियाज मोहम्मद नामक व्यक्ति ने इस मसले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की, जिसे कोर्ट ने सुको के निर्णय के आधार पर खारिज कर दिया। इस पर जैन संस्कृति रक्षा मंच के अध्यक्ष मिलाप चंद ने स्टडी सॢर्कल सोसायटी भोपाल के नाम से एनजीटी के मंदिर निर्माण स्थल वनभूमि पर होने के मसले को लेकर याचिका दायर कराई। इस पर एनजीटी ने 27 मई 2016 को मंदिर निर्माण कार्य स्थगित कर दिया। इसके खिलाफ ट्रस्ट ने फिर हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने 26 सितंबर 2016 को एनजीटी के उक्त आदेश पर रोक लगाते हुए निर्माण कार्य जारी रखने के निर्देश दिए।
एनजीटी में हुआ खुलासा
एएजी तिवारी ने बताया कि सुको द्वारा प्रतिबंधित किए जाने से संस्कृति रक्षा मंच के अध्यक्ष ने दूसरी संस्था से एनजीटी में याचिका लगवाई। याचिकाकर्ता सोसायटी ने एनजीटी को दिए अपने जवाब में बताया कि उक्त याचिका के लिए दसतावेज उन्हें मिलाप चंद जैन ने ही उपलब्ध कराए थे। तिवारी ने तर्क दिया कि एनजीटी में दायर उक्त याचिका में बाद में संस्कृति रक्षा मंच के अध्यक्ष जैन हस्तक्षेपकर्ता बन गए। सुप्रीम कोर्ट के मना करने के बावजूद मिलाप चंद बार-बार मामले को कोर्ट में किसी न किसी बहाने घसीट रहे हैं। उन्होंने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।
यह कहा कोर्ट ने
ओपन कोर्ट में डिवीजन बेंच ने कहा कि पहले सुप्रीम कोर्ट, फिर मप्र हाईकोर्ट मंदिर निर्माण को सही ठहरा चुके हैं। इसके बावजूद एनजीटी ने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर अनुचित तरीके से निर्माण पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। लिहाजा कोर्ट ने एनजीटी का 27 मई 2016 का आदेश निरस्त कर दिया। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया का मिलापचंद जैन ने दुरुपयोग किया है। इसलिए वे एक लाख रुपए कॉस्ट हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति को जमा करें। विस्तृत आदेश की फिलहाल प्रतीक्षा है।
Published on:
07 Nov 2017 09:23 pm
