दुनिया भर में प्रसिद्ध पर्यटक स्थल में तैनात है पुलिस कर्मी
जबलपुर। एंटी डकैती ऑपरेशन व अंधे हत्याकांड की जांच के दौरान अदम्य वीरता का प्रदर्शन करने वाले पुलिसवाले को दो आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिलेंगे। इस संबंध में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक फैसले में राज्य सरकार को निर्देशित किया है। एक एएसआई ने पाटन में पदस्थापना के दौरान पुलिस जांच में साहस और वीरता के लिए आउट ऑफ टर्न प्रमोशन नहीं दिए जाने के मामले को चुनौती दी थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने निर्देशित किया है कि एएसआई को दो आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिए जाएं। जस्टिस वंदना कसरेकर की सिंगल बेंच ने कहा है कि तीन माह के अंदर पांडे के केस का निराकरण कर दिया जाए।
एडीजीपी ने किया था अनुमादेन
थाना भेड़ाघाट, जबलपुर में एएसआई के पद पर कार्यरत रमाकांत पांडे ने २०१४ में यह याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया था कि पाटन में उनकी पदस्थापना के दौरान उन्होंने एंटी डकैती ऑपरेशन व अंधे हत्याकांड की जांच के दौरान अदम्य वीरता का प्रदर्शन किया था। इसके लिए तत्कालीन एसपी जबलपुर, पाटन एसडीओपी ने 23 जून 2004 और मार्च एवं अगस्त 2010 को याचिकाकर्ता को पुलिस रेगुलेशन के रेगुलेशन 70 ए के तहत उन्हें आउट ऑफ टर्न देने की अनुशंसा की थी। एडीजीपी ने भी इसका अनुमोदन किया।
ऐसे हुई सुनवाई
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डीएन पांडे ने बताया कि डीजीपी ने २ अप्रैल २०१४ को अभ्यावेदन निरस्त कर दिया। जबकि याचिकाकर्ता के समकक्ष दो अन्य अधिकारियों रामसनेही शर्मा व निसार अली को इसी तरह के प्रकरण में आउट ऑफ टर्न पदोन्नति का लाभ दिया जा चुका है। जबकि राज्य सरकार की ओर से आपत्ति जताते हुए कहा गया कि इसे बीएस परिहार के केस से मिलता जुलता मानते हुए उक्त आवेदन निरस्त किया गया।
तीन माह के अंदर पूरी करें प्रक्रिया
अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता के दावे को तार्किक व उचित मानते हुए याचिका स्वीकार कर ली। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिए कि वे तीन माह के अंदर याचिकाकर्ता को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी करें। याचिकाकर्ता को २१ फरवरी २००४ से एएसआई पद पर व २४ फरवरी २०११ से एएसआई पद पर पदोन्न्त करने के निर्देश दिए गए।