आदेश पालन में देरी के लिए मप्र हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती, बिना शर्त माफी मांगने पर हाजिरी से मिली छूट
जबलपुर। सीनियर आईएएस राधेश्याम जुलानिया को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की अनदेखी करना महंगा पड़ा गया। मप्र हाइकोर्ट ने अवमानना के एक प्रकरण में मंगलवार को सुनवाई की। इसमें सीनियर आइएएस अधिकारी राधेश्याम जुलानिया सहित जल संसाधन विभाग के पांच अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर आदेश के पालन में हुई देरी के लिए दस हजार रुपए कॉस्ट लगाई है। जस्टिस जेके महेश्वरी की बेंच ने जुलानिया सहित अन्य अधिकारियों की ओर से बिना शर्त माफी मांगने पर सभी को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी। कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता को निर्देशित लाभ का भुगतान जल्द से जल्द किया जाए।
यह है मामला
सिवनी जिले के जल संसाधन विभाग कर्मी खिलेश्वर भार्गव की ओर से यह अवमानना याचिका दायर की गई है। भार्गव ने याचिका में कहा कि 15 जुलाई 2015 को हाइकोर्ट ने सरकार को उसे क्रमोन्नति का लाभ 90 दिनों में देने को कहा था। लेकिन जानबूझकर समयसीमा बीतने पर भी कोर्ट के उक्त आदेश का पालन अफसरों ने नही किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि 1 साल 10 माह बाद भी जानबूझकर आदेश की अवहेलना की जा रही है। इसका सबूत ये है कि जब इंजीनियर इन चीफ आरके सुकलिकर को 12 फरवरी 2018 को कोर्ट के समक्ष हाजिर होने के आदेश दे दिए गए, तब 8 फऱवरी को उन्होंने आदेश पालन न होने की नोट शीट बना कर कोर्ट मे पेश कर दी। इस पर कोर्ट ने तत्कालीन जल संसाधन विभाग प्रमुख सचिव राधेश्याम जुलानिया व अन्य को शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे ।
दो दिन पांच सीनियर अधिकारी रहे हाजिर
सोमवार के बाद मंगलवार को भी कोर्ट के समक्ष तत्कालीन जल संसाधन विभाग इंजीनियर इन चीफ एमजी चौबे, वर्तमान इंजीनियर इन चीफ राजीव सुकलीकर, अजीत कुमार जैन तत्कालीन चीफ यंत्री बालाघाट, एसएस महावर तत्कालीन ईई बालाघाट व तत्कालीन टे्रजरी अधिकारी बालाघाट अश्वनी सिंह उपस्थित रहे। जुलानिया सहित सभी की ओर से कहा गया कि आदेश का पालन किया जाएगा, लिहाजा बिना शर्त उन्हें उपस्थिति से माफी दी जाए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आग्रह स्वीकार कर लिया। लेकिन आदेश पालन में हुए इस विलंब के लिए कोर्ट ने दस हजार रुपए की कॉस्ट लगाते हुए कहा कि अनावेदक अधिकारी इस राशि का भुगतान करें।