जबलपुर

एमपी में मातृत्व अवकाश पर 80 दिन का अड़ंगा, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा- 80 दिन काम की शर्त बताकर मातृत्व लाभ नहीं रोका जा सकता

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Apr 07, 2026
MP High Court's Major Verdict on Maternity Leave
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Maternity Leave- दुनियाभर में मातृत्व अवकाश पर खूब चर्चा चल रही है। देश में भी इसकी मांग की जा रही है। मध्यप्रदेश में मातृत्व अवकाश दिया तो जा रहा है पर कई विभागों में अनेक दिक्कतें आ रहीं हैं। सबसे ज्यादा नियमानुसार न्यूनतम 80 दिन काम का अड़ंगा लगाया जाता है जिसपर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने कहा है कि अधिनियम की धारा 2(1) का दायरा व्यापक है और राज्य सरकार के संस्थान में कार्यरत महिला को 80 दिन काम पूरा न होने का हवाला देकर मातृत्व लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मातृत्व लाभ अधिनियम में यह शर्त जरूर है, लेकिन राज्य के संस्थानों पर यह रोक लागू नहीं होगी। राज्य का दायित्व है कि वह नागरिकों, खासकर महिलाओं, के लिए कल्याणकारी उपाय सुनिश्चित करे। कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को मातृत्व लाभ का फायदा देने का निर्देश दिया।

छह माह का मातृत्व अवकाश तो दिया गया था, लेकिन मानदेय देने से इनकार कर दिया गया था

जबलपुर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने यह आदेश डॉ. प्रीति साकेत बनाम मध्यप्रदेश शासन मामले में दिया। याचिकाकर्ता ने ट्रायल कोर्ट के 16 जून 2023 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 5 अप्रेल 2023 से छह माह का मातृत्व अवकाश तो दिया गया था, लेकिन मानदेय देने से इनकार कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता की नियुक्ति संविदा/अस्थायी प्रकृति की थी, इसलिए उन्हें सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता और उन पर मप्र सिविल सेवा अवकाश नियम लागू नहीं

कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति संविदा/अस्थायी प्रकृति की थी, इसलिए उन्हें सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता और उन पर मप्र सिविल सेवा अवकाश नियम लागू नहीं होंगे। ऐसे में मुख्य प्रश्न यह था कि क्या उन्हें मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के तहत संरक्षण मिलेगा।

अदालत ने कहा संविधान की भावना और महिला कल्याण के सिद्धांतों को देखते हुए राज्य इस तकनीकी आधार पर मातृत्व लाभ नहीं रोक सकता

अदालत ने कहा कि अधिनियम की धारा 2(1) का दायरा व्यापक है और यह सरकार से संबंधित प्रतिष्ठानों तथा 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों पर लागू हो सकता है। अदालत ने कहा संविधान की भावना और महिला कल्याण के सिद्धांतों को देखते हुए राज्य इस तकनीकी आधार पर मातृत्व लाभ नहीं रोक सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को मातृत्व लाभ का फायदा देने का निर्देश दिया।

Published on:
07 Apr 2026 11:32 am