WhatsApp - कोर्ट ने कहा- यह अपराध नहीं, शासकीय शिक्षक फैजान अंसारी की याचिका पर हाईकोर्ट ने उन्हें राहत दी, जस्टिस बीपी शर्मा की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि वॉट्सऐप स्टेट्स में उर्दू शायरी शेयर करना अपराध नहीं
WhatsApp- मध्यप्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट ने बैतूल के एक स्कूल टीचर को राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी है। इस सरकारी टीचर पर अपने WhatsApp स्टेटस पर एक उर्दू शायरी शेयर करने का आरोप था। उन्होंने शायरी का वीडियो अपलोड किया था जिसपर आरोप लगाया गया था कि इस पोस्ट से सामाजिक सद्भाव बिगड़ सकता है। हाईकोर्ट ने पुलिस के इस तर्क को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह शायरी महिलाओं के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे पर एक व्यंग्यात्मक और विचारोत्तेजक टिप्पणी भर है। रिकॉर्ड पर ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह पता चले कि टीचर का मकसद नफरत फैलाना या सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करना था।
बैतूल के शासकीय शिक्षक फैजान अंसारी की याचिका पर हाईकोर्ट ने उन्हें राहत दी है। जस्टिस बीपी शर्मा की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि वॉट्सऐप स्टेट्स में उर्दू शायरी शेयर करना अपराध नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध दर्ज तीन एफआइआर निरस्त करने का आदेश पारित कर दिया।
शिक्षक फैजान अंसारी ने पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। यह मामला शिक्षक के अपने वॉट्सऐप स्टेटस पर उर्दू शायरी और कविता साझा करने से संबंधित था। पुलिस ने शिक्षक पर अपराध दर्ज किया था। आरोप था कि पोस्ट से सामाजिक सद्भाव बिगड़ सकता है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता शिक्षक फैजान अंसारी ने कहा, उन्होंने सिर्फ साहित्यिक और भावनात्मक अभिव्यक्ति के तौर पर शायरी साझा की थी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी दलील स्वीकार कर ली। जस्टिस बीपी शर्मा ने कहा कि "अभिव्यक्ति से जुड़े मामलों में आपराधिक दायित्व केवल व्यक्तिगत धारणाओं या मनगढ़ंत आशंकाओं के आधार पर नहीं थोपा जा सकता। इसका आधार उकसाने या सामाजिक सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने की प्रवृत्ति के स्पष्ट और ठोस सबूत होने चाहिए।
याचिकाकर्ता फैजान अंसारी के खिलाफ बैतूल जिले के चिचोली पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(2) के तहत FIR दर्ज की गई थी। 22 जुलाई 2025 को उन्होंने अपने WhatsApp स्टेटस पर एक वीडियो पोस्ट किया। उसी दिन पुलिस ने अंसारी को थाने बुलाकर कुछ शिकायतों के आधार पर उनपर FIR दर्ज कर ली। उनका मोबाइल फ़ोन भी ज़ब्त कर लिया। फैजान अंसारी ने अपने WhatsApp स्टेटस पर शायर शोएब कियानी द्वारा लिखी गई उर्दू नज़्म 'बे-हया' पढ़ते हुए एक वीडियो अपलोड किया था। पुलिस ने इसे आपत्तिजनक माना।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, " शोएब कियानी की जिस उर्दू कविता को याचिकाकर्ता ने अपने WhatsApp स्टेटस (DP) पर अपलोड किया, वह मानवाधिकारों की स्थिति और उन पर एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी से संबंधित है। यह शायरी पाकिस्तान या किसी अन्य देश में महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को दर्शाती है।" इस शायरी को सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने साझा किया। कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों में साहित्य जगत की जानी-मानी हस्तियों ने इसकी सराहना की थी।