
जबलपुर। पुलिस का नाम सुनते ही जहन में एक ही अक्स उतरता है वो बेइमानी, भ्रष्ट और कानून के रखवाले के नाम पर आम जनता को परेशान करने वाला, लेकिन ये बात पूरी सौ फीसदी सच नहीं है। पुलिस विभाग में ऐसे भी जांबाज और ईमानदार पुलिस जवान मौजूद हैं जो अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। इनके काम को देखकर लोग खुद सैल्यूट करने लगते हैं। आला अधिकारी भी इन पर गर्व करते हैं। वे कहते हैं कि ये पुलिस की शान हैं। इन पुलिस वालों में कोई अपने काम से जाना जाता है तो किसी ने अपनी जान जोखिम में डाल दूसरों को जिंदगी बख्शी है। ऐसे ही जवानों को पत्रिका जबलपुर ने खुले मंच पर सम्मानित किया। साथ ही शहरवासियों ने इनके जज्बे को सलाम किया।
कर्तव्यनिष्ठा से निभाई ड्यूटी- संजय शर्मा, थाना प्रभारी, हनुमानताल
शहर के संवेदनशील थाना के प्रभारी हैं। समय के पाबंद हैं। तैनाती के दौरान कई विषम परिस्थितियां आईं, जब २४ घंटे वे सजगता से तैनात रहे। लॉ एंड ऑर्डर की भी स्थितियां बनी, सभी में शर्मा को जो दायित्व सौंपा गया, उन्होंने नियम व अनुशासन के रहकर उसे पूरी कर्तव्यनिष्ठा से पूरा किया। शर्मा के काम का उदाहरण अन्य थाना प्रभारियों को वरिष्ठों द्वारा दिया जाता है। वे अपने काम के प्रति इतने सजग रहते हैं कि कभी भी कहीं भी पहुंचकर अपने मातहत कर्मचारियों को चौंका देते हैं।
आरक्षक भर्ती में रैकेट का किया भंडाफोड़- सहदेव राम साहू, एसआई, गौर चौकी
कहने को तो ये मामूली सब इंस्पेक्टर हैं, लेकिन इन्होंने वो काम कर दिखाया जो पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया। राजनीतिक गलियारों में इनके द्वारा किए गए काम के बाद उथल पुथल मच गई। दरअसल, प्रदेश में चल रहे आरक्षक भर्ती परीक्षा में मुरैना निवासी रूस्तम सिंह के स्थान पर बिहार के नवादा जिले में रहने वाले मोहम्मद रईस आलम परीक्षा देने पहुंचा। रईस पुलिस के हत्थे चढ़ गया। जांच हुई, तो पता चला कि वह दिल्ली की एक कोचिंग में पढ़ता है। जांच अधिकारी साहू दिल्ली पहुंचे, वहां से कई सारे साक्ष्य एकत्र किए। जांच में खुलासा हुआ कि यह पूरा रैकेट है, जल्द ही पुलिस इसका भंडाफोड़ करने वाली है।
अदम्य साहस, नहर में कूदकर बचाई जान- हवलदार दिलीप लकड़ा, थाना पाटन
०६ अगस्त को कचनार सिटी निवासी बृजेन्द्र धरमपुरिया पिता राजेन्द्र धरमपुरिया, मां मीरा, बुआ संगीता व शशांक के साथ नागपुर जा रहे थे। सभी कार में सवार थे। साढ़े आठ बजे वे पाटन से एक किलोमीटर आगे पहुंचे ही थे कि कार अनियंत्रित होकर सीधे नहर में जा गिरी। सूचना पर पाटन थाने के हवलदार दिलीप लकड़ा पहुंचे। जान की परवाह किए बिना अदम्य साहस का परिचय देते हुए पानी में कूद पड़े। नहर में तेज बहाव था, बारिश भी हो रही थी, इस बीच लकड़ा ने कार का कांच तोड़ बृजेन्द्र को बचा लिया।
ट्रैफिक को सटीक दिशा देने में माहिर- त्रिलोकी प्रसाद यादव, एएसआई, ट्रैफिक थाना
शहर की लचर यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने में ट्रेफिक पुलिस की बड़ी भूमिका है। ऐसे में किसी चौराहे पर रोटरी बनाकर आवागमन को सुगम बनाना हो या फिर स्टॉपर, बेरीकेट लगाकर लेफ्ट टर्न फ्री कराना हो। त्रिलोकी प्रसाद इस सब में माहिर माने जाते हैं। शहर में कहां का ट्रैफिक किस कारण बाधित होता है, इसका सर्वे कर हल खोजने में सबसे काबिल अफसर। इसलिए बड़े आयोजनों के पूर्व आला अधिकारी भी इनसे जरूर चर्चा करते हैं।