Old Books : हमारी हर एक किताब के लिए किसी पेड़ को जान गंवाना पड़ती है। उन्हीं किताबों में हम पर्यावरण को बचाने के लिए लंबे-लंबे लेख और निबंध पढ़ते हैं।
Old Books : हमारी हर एक किताब के लिए किसी पेड़ को जान गंवाना पड़ती है। उन्हीं किताबों में हम पर्यावरण को बचाने के लिए लंबे-लंबे लेख और निबंध पढ़ते हैं। शादय ही कभी किसी के जेहन में आता होगा कि इनके लिए कितने पेड़ों की बलि चढ़ा दी जाती है। आंकड़ों के अनुसार करीब एक लाख किताबों के लिए एक हजार पेड़ों को काट दिया जाता है।
हर साल नई किताबों के लिए हजारों हेक्टेयर के जंगल तबाह हो जाते हैं। प्रकृति के दोहन को रोकने में हम मददगार हो सकते हैं। अब समय आ गया है कि पुरानी किताब का उपयोग करना गर्व का विषय होना चाहिए। जब हम पुरानी किताब सहेजेंगे तो निश्चित ही कहीं-कोई पेड़ थैंक-यू बोलेगा। हमारे छोटे से प्रयास से प्रकृति खिलखिलाएंगी और जंगल मुस्कुरा उठेंगे। इसके लिए आवश्यक है कि समाज, प्रशासन, संगठन मिलकर इस काम में आगे आएं ।
किताबों का दान केवल चंद पैसे बचाने तक ही सीमित नहीं है। औसतन एक पेड़ से अधिकतम 100 किताबें तैयार होती हैं। हर साल करोड़ों की संख्या में किताबें पुरानी हो जाने के बाद अलग कर दी जाती है। इसके एवज में नई किताबों को छापना पड़ता है।
विद्यालयों में बच्चों के लिए किताबों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। केवल किताबों की कीमत 4,000 से लेकर 7,000 रुपये तक होती है। बच्चों को पुरानी किताबें मिलने से अभिभावकों का आर्थिक बोझ भी काफी हद तक कम होगा।