
जबलपुर. पिछले चार महीनों में पेट्रोल में करीब सवा रुपए और डीजल में करीब दो रुपए प्रति लीटर का इजाफा होने से लोगों की मुसीबतें बढ़ती नजर आ रही हैं। एक तरफ आमजन का बजट बिगड़ रहा है। वहीं व्यापारी भी अपने व्यापार से इसका सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे हैं। मंगलवार को पेट्रोल के दाम ८०.३१ रुपए और डीजल ६९.५२ रुपए प्रति लीटर हो गया। जिले में दोनों ईंधन की बड़ी खपत है। करीब १२५ पंप हैं। रोजाना २ लाख लीटर से ज्यादा पेट्रोल एवं ४ लाख लीटर से अधिक डीजल की खपत होती है।
विरोध के स्वर: चार महीने से ईंधन में लगातार हो रहे इजाफे का असर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढऩे से लोगों में दिख रहा आक्रोश
जब ६० रुपए लीटर पेट्रोल बिका तब भाजपा ने हो हल्ला मचाया। कार्यकर्ता सड़क पर आ गए। अब जब ८० रुपए कीमत हो गई तो कोई सामने नहीं आ रहा है। इसका सीधा मतलब है कि विरोध में केवल स्वार्थ होता है जनहित नहीं।
- दिनेश यादव, अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढऩे का सीधा असर उद्योग-धंधों पर होगा। महंगाई में इजाफा होगा। गरीबी में जीवन बसर करने वालों की मुसीबत बढ़ जाएगी। सरकार को चाहिए कि अपने टैक्स में कमी लाए ताकि आमजन को राहत मिले।
- प्रेम दुबे, चेयरमैन जबलपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
रोजाना कीमतें बदलने से आम आदमी को कहां से राहत मिली, इसका पता ही नहीं चलता। ग्राहक पेट्रोल पंप तो आ रहे हैं, लेकिन जितनी मात्रा में वह ईंधन भरवाता था, उसमें कमी आई है। इसका असर व्यापार पर भी होता है।
- अशोक जैन, पेट्रोल पंप संचालक
नौकरी पेशा वर्ग की सीमित आय होती है। निजी क्षेत्र में तो यह आय और भी कम है। बढ़ती महंगाई के हिसाब से निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते नहीं मिलते। एेसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा मुसीबत बढ़ा रहा है।
- एमएन सिंह, सेवानिवृत्त कर्मचारी
मेरा फोटोकॉपी का छोटा सा बिजनेस है। कागज और दूसरी सामग्री खरीदने यहां-वहां जाना पड़ता है, लेकिन पेट्रोल महंगा होने से परेशानी बढ़ गई है। अब ईंधन के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। जिससे बजट बिगड़ रहा है।
- दिलीप यादव, व्यवसाई
सवारी उतना ही पैसा दे रही है जितना पहले देती थी जबकि पेट्रोल और डीजल के दाम रोज बढ़ रहे हैं। एेसे में हमारा घर केसे चलेगा। इसकी वजह से सारी चीजें महंगी होती जा रही हैं। इससे हमारे व्यवसाय पर बुरा असर पड़ रहा है।
- आशीष पिल्ले, ऑटो चालक