
जबलपुर। जिले में इस बार सम्पत्ति की कीमतें बढ़ सकती हैं। यह उन तमाम स्थानों के लिए होगी, जिन्हें पंजीयन कार्यालय की ओर से तय किया गया है। इनकी संख्या 3720 के लगभग है। बीते करीब पांच साल से जिले में कलेक्टर गाइडलाइन में बदलाव नहीं हुआ है। इस बार 20 से 25 फीसदी बढ़ोतरी हो सकती है। इसका निर्णय बुधवार को जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में होगा।
पंजीयन कार्यालय ने संपदा से मिले आंकड़ों और संपत्ति के विक्रय मूल्य की प्रचलित दरों का अध्ययन कर इनका निर्धारण किया है। इन तमाम वजहों को जिला मूल्यांकन समिति के समक्ष रखा जाएगा। अभी स्थावर संपत्ति की कलेक्टर गाइडलाइन (बाजार मूल्य) की जो दरें हैं, उनमें से बहुत कम जगह होंगी जहां उस कीमत पर संपत्ति का क्रय एवं विक्रय होता है। यह बढकऱ ही होता है।
राजस्व वाली जगहों पर जोर
कलेक्टर गाइडलाइन में आवासीय, व्यवसायिक एवं कृषि क्षेत्र की संपत्तियों की दरें तय हैं। इनमें जिन जगहों से ज्यादा राजस्व यानी संपत्ति का मूल्य अधिक प्रचलित हैं, वहां पर गाइडलाइन की दरें सबसे ज्यादा हो सकती हैं। इनमें अधिकांश शहर के व्यवसायिक क्षेत्र हैं। जैसे बड़ा फुहारा, मिलौनीगंज, सिविक सेंटर, करमचंद चौक, घमापुर, सराफा, कोतवाली, दीक्षितपुरा, रद्दी चौकी, सदर, गोरखपुर, मदनमहल आदि। बताया जाता है कि इस बात पर भी ध्यान दिया गया है कि किसी भी जगह फिजूल में दरें नहीं बढ़ाई जाएं।
बाजार मूल्य से कहीं ज्यादा मिला ऑफर
शहर में ऐसे कई इलाके हैं जहां पर भूखंडों के बाजार मूल्य से अधिक के ऑफर मिले। विजय नगर की ही बात करें तो यहां पर प्रचलित कलेक्टर गाइडलाइन करीब 1190 प्रति वर्गफीट है, लेकिन जेडीए को यहां पर 1900 रुपए प्रति वर्गफीट तक की कीमत मिली। शताब्दीपुरम में भी यही दर प्रचलित है लेकिन वहां भी 3300 रुपए वर्गफीट तक कीमत मिली। यही हाल राइट टाउन, नेपियर टाउन, बिलहरी जैसे
इलाकों का है।
यह कमेटी तय करेगी दरें
जिला मूल्यांकन समिति में कलेक्टर अध्यक्ष होते हैं। सचिव के रूप में जिला पंजीयक एवं सदस्यों में नगर निगम आयुक्त, जिला पंचायत सीईओ, सभी एसडीएम, वन मंडल अधिकारी, कार्यपालन यंत्री लोकनिर्माण विभाग, कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग, अधीक्षक भूमि अभिलेख, अधीक्षक डायवर्सन शाखा, भाड़ा नियंत्रक अधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जबलपुर विकास प्राधिकरण, उपायुक्त मप्र गृह निर्माण मंडल जबलपुर, संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश विभाग, महाप्रबंधक जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र।