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नसबंदी के बाद भी 68 महिलाओं ने दिया बच्चों को जन्म, MP के 9 जिलों से सामने आए ऐसे मामले

Sterilization operation failure: जबलपुर जिले में नसबंदी ऑपरेशन फेल होने के मामले सामने आए है जहां नसबंदी के बाद 68 महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया। अब मुआवजे को दफ्तर के काट रहे चक्कर।
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sterilization operation failure 68 women compensation health department

Sterilization operation failure: जबलपुर जिले में नसबंदी के बाद भी 68 महिलाओं ने दिया बच्चों को जन्म (फोटो सोर्स- Magnific)

Jabalpur sterilization operation failure: मध्य प्रदेश के जबलपुर में परिवार को छोटा रखने की उम्मीद में नसबंदी कराने वाले दंपतियों के सामने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जबलपुर जिले में नसबंदी ऑपरेशन फेल होने के मामले सामने आए हैं। हाल ही में 68 महिलाओं ने नसबंदी कराने के बाद भी बच्चों को जन्म दिया। इनमें से कई दंपतियों को अब तक शासन की ओर से मिलने वाला मुआवजा नहीं मिला है।

स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काट रहे परिवार, 9 जिलों से सामने आए प्रकरण

प्रभावित परिवार आर्थिक सहायता के लिए स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काट रहे हैं। नसबंदी ऑपरेशन फेल होने की स्थिति में शासन की ओर से संबंधित परिवार को 30 हजार रुपए मुआवजा देने का प्रावधान है। इसके बावजूद जबलपुर सहित संभाग के 9 जिलों में कई प्रकरण लंबित बताए जा रहे हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि नसबंदी के बाद गर्भधारण होने पर उन्होंने विभागीय स्तर पर आवेदन और शिकायतें कीं, लेकिन लंबे समय बाद भी सहायता राशि नहीं मिली। कुछ मामलों में सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समाधान नहीं हुआ।

तकनीकी चूक सहित कई संभावित कारण

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार नसबंदी फेल होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें ऑपरेशन के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं होना, तकनीकी चूक, पर्याप्त सावधानी नहीं बरतना और ऑपरेशन के बाद जरूरी चिकित्सकीय सलाह व फॉलोअप का अभाव शामिल हैं।

सुनिश्चित की जाएगी कार्रवाई

नसबंदी फेलियर में प्रावधान के अनुसार मुआवजा दिया जाता है। लंबित मामलों की जानकारी लेकर संबंधित जिलों से प्रकरणों की समीक्षा की जाती है। पात्र मामलों में कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।-डॉ. भरत कुमार खटीक,क्षेत्रीय संचालक

ग्वालियर हाईकोर्ट ने खारिज किया मुआवजा

बता दें कि, कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश की ग्वालियर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने नसबंदी ऑपरेशन के बाद बच्चे के जन्म पर मुआवजे की मांग करने वाली महिला की प्रथम अपील खारिज कर दी थी। महिला ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रायल कोर्ट में 1.5 लाख रुपए मुआवजे का दावा किया था। हाईकोर्ट ने सोनोग्राफी रिपोर्ट और डॉक्टरों के बयानों का परीक्षण किया। रिकॉर्ड के अनुसार 4 जुलाई 2004 को महिला करीब 22 सप्ताह की गर्भवती थी। गर्भावस्था की अवधि की गणना करने पर गर्भधारण की तिथि 17 मार्च 2004 से पहले की निकलती है। यानी नसबंदी ऑपरेशन के दिन ही महिला पहले से गर्भवती थी।

टेस्ट में नहीं पता चला था महिला का गर्भ

कोर्ट ने यह भी पाया कि नसबंदी से पहले महिला के पैथोलॉजिकल टेस्ट कराए गए थे। इन जांचों में शुरुआती गर्भ का पता नहीं चला था। डॉक्टरों ने उपलब्ध जांच रिपोर्ट के आधार पर ही नसबंदी की प्रक्रिया की थी। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि डॉक्टरों ने जानबूझकर गर्भावस्था की स्थिति की अनदेखी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नसबंदी के बाद बच्चे का जन्म हो जाना अपने आप में चिकित्सकीय लापरवाही का सीधा प्रमाण नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने महिला की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।