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एमपी में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना पड़ी भारी, 2 IAS अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

IAS Arrest Warrant: हाईकोर्ट ने कमिश्नर-एसपी को दिए दोनों अधिकारियों को 21 सितंबर को कोर्ट में पेश करने के निर्देश, कोर्ट का आदेश न मानने और कोर्ट में पेश नहीं होने के कारण जारी हुआ गिरफ्तारी वारंट।
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जबलपुर

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Shailendra Sharma

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Updated: 14 Sep 2026, 10:30 PM IST

IAS Vivek Porwal And IAS Sandeep GR

mp high court arrest warrant two ias officers, IAS विवेक पोरवाल और संदीप जीआर की फाइल फोटो (Source-Patrika)

MP High Court Arrest Warrant IAS Officers: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के दो IAS अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए दोनों अधिकारियों को 21 सितंबर को कोर्ट में पेश करने के निर्देश कमिश्नर-एसपी को दिए हैं। कोर्ट ने जिन दो IAS के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है उनके नाम विवेक पोरवाल और संदीप जीआर हैं। कोर्ट ने कहा है कि दोनों अधिकारियों ने न तो कोर्ट का आदेश माना और न ही वारंट जारी होने के बाद कोर्ट में पेश होने के लिए पहुंचे।

साल 2025 का है मामला

मामला सागर कलेक्टर कार्यालय की अनुभाग अधिकारी शीला सेन के नियमितीकरण से जुड़ा है। शीला सेन के नियमितीकरण के मामले में हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2025 को तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर को 90 दिन में निर्णय लेने के आदेश दिए थे। लेकिन तय समय बीतने के बाद भी हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं हुआ जिसके कारण अवमानना याचिका दायर की गई। इसके बाद सितंबर 2025 में हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रमुख सचिव राजस्व विवेक पोरवाल और तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर को अवमानना के याचिका के नोटिस जारी किए गए।

कोर्ट ने जारी किया गिरफ्तारी वारंट

हाईकोर्ट ने कहा है- दोनों अधिकारियों विवेक पोरवाल और संदीप जीआर ने नोटिस मिलने के बाद भी न तो वकील के जरिए कोर्ट में उपस्थिति दर्ज कराई और न ही आदेश के पालन से संबंधित रिपोर्ट पेश की। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए भोपाल कमिश्नर और सागर एसपी को वारंट तामील कराने की जिम्मेदारी सौंपी है और 21 सिंतंबर 2026 को दोनों अधिकारियों को कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अवमानना के मामलों में अधिकारी पूरी तरह निष्क्रियता दिखा रहे हैं।