(फोटो: मानस भवन में राम कथा का आयोजन)
सर्वसमर्थ भगवान शिव जो गंगा को अपने सिर पर धारण किए हैं, विधाता के लिखे को मिटाकर जो वरदान देते हैं वे हनुमान चालीसा पढऩे वालों को सिद्धी प्राप्ति के साक्षी हैं। तब हनुमान चालीसा मंत्र शक्ति है। रुद्रावतारी हनुमान शिव के रूप ही कहे जाते हैं। ऐसे में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम भी उनकी बात को टाल नहीं सकते। यह उद्गार मानस भवन में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन स्वामी राजेश्वरानंद ने व्यक्त दिए।
राम अवेयरनेस मूवमेंट द्वारा आयोजित कथा में स्वामी जी ने सत्संग अनुयाईयों को रामकथा के कई पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि हनुमान जी काल को भी खा लेने की शक्ति रखते हैं। वे कालों के काल महाकाल भी हैं। इसलिए उन्हें शंकर सुवन केशरी नंदन कहा गया है। इनका वंदन सभी दुखों, कष्टों से मुक्ति दिलाता है।
स्वामीजी ने माता जानकी को रावण के बंधन की कथा पर कहा कि जब जानकी माता की दशा हनुमानजी ने देखी, तो वे बालक की तरह रोने लगे। स्वामी जी ने जानकी माता के स्वरूप को ही भारत माता का स्वरूप बताया। इस दौरान पूर्व महाधिवक्ता आरएन सिंह, पूर्व महापौर सुशीला सिंह, सांसद राकेश सिंह, उद्योगपति कैलाश गुप्ता, डॉ. जितेन्द्र जामदार समेत भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।