विश्वविद्यालय में हुए फर्जीवाड़े के 56 लाख रुपए स्मार्ट सिटी लिमिटेड के खाते में जमा कराए गए थे। इसका खुलासा बैरागढ़ भोपाल पुलिस की स्मार्ट सिटी को जारी किए गए नोटिस से हुआ है।
RGPV scam : बहुचर्चित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) भोपाल के एफडी घोटाले का जबलपुर कनेक्शन सामने आया है। विश्वविद्यालय में हुए फर्जीवाड़े के 56 लाख रुपए स्मार्ट सिटी लिमिटेड के खाते में जमा कराए गए थे। इसका खुलासा बैरागढ़ भोपाल पुलिस की स्मार्ट सिटी को जारी किए गए नोटिस से हुआ है। जिसने घोटाले की रकम खाते से वापस करने को कहा है।
RGPV scam : अब स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने भी आरबीएल बैंक के एक अधिकारी के खिलाफ जबलपुर में एफआइआर दर्ज कराई है। शहर के मदनमहल थाने में दर्ज कराई गई एफआइआर के अनुसार स्मार्ट सिटी लिमिटेड जबलपुर के प्रबंधन की ओर से ऑपरेशन और मेंटेनेंस का खाता मार्च 2022 में आरबीएल बैंक में खुलवाया था।
RGPV scam : शिकायतकर्ता स्मार्ट सिटी के प्रशासनिक अधिकारी रवि राव ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया आरबीएल बैंक के तत्कालीन टास्क मैनेजर कुमार मयंक (अब इंदौर में पदस्थ) ने पूरी कराई थी। तब अलग-अलग तिथियों में इस खाते में 20 करोड़ रुपए जमा कराए गए थे। स्मार्ट सिटी प्रबंधन का दावा है कि बैंक में बचत खाता खोला गया था, जिसे बाद में बदलकर चालू खाता कर दिया गया, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई थी।
आरजीपीवी घोटाले की जांच कर रही बैरागढ़ पुलिस को 56 लाख रुपए की स्मार्ट सिटी की एंट्री ऐसी मिली जिसमें रकम आरजीपीवी के खाते से ट्रांसफर की गई थी। पुलिस ने स्मार्ट सिटी को नोटिस भेजकर बयान दर्ज कराने और रकम वापस करने को कहा। स्मार्ट सिटी के अधिकारियों से पूछतांछ हुई तो प्रबंधन ने खुद के साथ ही ठगी होने की बात कही। यह भी आरोप लगाया कि आरबीएल बैंक प्रबंधन ने उन्हें सही और पूरा स्टेटमेंट नहीं दिया और बचत खाते को चालू खाते में करने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। स्मार्ट सिटी के प्रशासनिक अधिकारी रवि राव की शिकायत पर मदन महल पुलिस कुमार मयंक के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन की राशि को खुर्द-बुर्द करने सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है।
आरजीपीवी घोटाले के 56 लाख रुपए स्मार्ट सिटी के खाते में जमा कराए जाने की गुत्थी अभी सुलझी नहीं है और अधिकारियों का दावा है कि आरबीएल बैंक के अधिकारियों ने उनके 1.31 करोड़ रुपए डुबा दिए। जो उन्हें ब्याज के रूप में दिए जाने का भरोसा दिलाया गया था। शिकायत में इस बात का भी उल्लेख है कि आरबीएल बैंक के टास्क मैनेजर कुमार मयंक ने 6.25 प्रतिशत ब्याज दिए जाने का लिखित में दिया था। लेकिन बाद में चालू खाता करके यह रकम नहीं दी गई।