-राज्य पुरातत्व विभाग की सूची से अलग किया गया होटल, पर्यटन के लिए होगा शुरू
जबलपुर. सिविल लाइन क्षेत्र में 18-19 वीं शताब्दी के अंग्रेजों के जमाने के राजसी होटल में अब आम आदमी भी आराम फरमा सकेंगे। उस दौर में इस आलीशान रायल होटल में सिर्फ यूरोपीय अफसर ही ठहरते थे। भारतीयों को प्रवेश की अनुमति भी नहीं थी। शहर में पर्यटन के लिहाज से होटल को नए सिरे शुरू किया जा रहा है। देश-विदेश के पर्यटकों से यह स्थान फिर रौशन होगा। राज्य पुरातत्व विभाग ने पहले राजकुमारी बाई की कोठी बनाम रॉयल होटल को राज्य संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज किया था। मप्र पर्यटन विकास निगम ने कलेक्टर को पत्र लिखकर होटल को पर्यटन की दृष्टि से उसी स्वरूप में शुरू करने का प्रस्ताव दिया था। उसके बाद राज्य पुरातत्व विभाग ने होटल को हैंडओवर करने की प्रक्रिया शुरू की है। फिलहाल रायल होटल को शहर के राज्य संरक्षित स्मारकों की सूची से हटा दिया गया है। राज्य पुरातत्व विभाग के मुख्यालय से सौंपने की स्वीकृति प्राप्त होते ही होटल शुरू करने की कवायद शुरू होगी।
गोविंद भवन के सामने होटल के भवन में छतयुक्त कमानीदार विशाल प्रवेश द्वार है। दोनों ओर कमानीदार आर्चयुक्त दो छोटे दरवाजे हैं। सीढिय़ों के पास टॉवर हैं। भवन में एक बड़ा कक्ष और शेष अपेक्षाकृत छोटे कक्ष हैं, जो रोशनदार, हवादार हैं। कक्ष की दीवारें अलंकृत हैं।
यूरोपियन वास्तुशास्त्र से हुआ था निर्माण
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह राजा गोकुलदास की सम्पत्ति थी, जिन्होंने इस भवन को यूरोपीय वास्तुशास्त्र के आधार पर बनाकर अपनी नातिन राजकुमारी बाई को दिया था। कालांतर में इसे रॉयल होटल समूह को दे दिया गया। इस होटल में भारतीय मूल के लोगों का प्रवेश वर्जित था। स्वतंत्रता के बाद इसमें मप्र विद्युत मंडल और उसके बाद एनसीसी कन्या बटालियन का कार्यालय था। फिलहाल भवन रिक्त है।
रॉयल होटल को राज्य संरक्षित स्मारकों की सूची से अलग कर दिया गया है। भोपाल मुख्यालय की अनुमति प्राप्त होने के बाद होटल को मप्र पर्यटन विकास निगम को सौंप दिया जाएगा।
-पीसी महोबिया, प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर, राज्य पुरातत्व विभाग
शहर में रॉयल होटल एक धरोहर है। इसकी विशेष पहचान है। भवन हैंडओवर होने के बाद पुराने स्वरूप में ही होटल शुरू किया जाएगा। देश-विदेश के पर्यटक ब्रिटिश हुकूमत के भवन में ठहरना पसंद करेंगे।
-मोंसी जोसफ, आरएम मप्र पर्यटन विकास निगम