
जबलपुर। संस्कारधानी में बनने वाली मिठाइयां और नमकीन देश के कोने कोने में प्रसिद्ध है। शुद्धता से लेकर स्वाद तक की बात की जाए तो प्रदेश में सबसे पहले जबलपुर का ही नाम आता है। यहां आने वाले अपने साथ मिठाइयां और नमकीन साथ ले जाना नहीं भूलते हैं। इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए हो रहे प्रयासों में राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक हीलाहवाली रोड़ा बन रही है। जिसे जल्द दूर करने के प्रयास हो रहे हैं।
शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर पनागर के समीप उर्दुआ-खुर्द में प्रस्तावित मिष्ठान और नमकीन क्लस्टर स्थापित करने का मामला महज जमीन उपलब्ध नहीं कराए जाने से करीब चार वर्षों से उलझा पड़ा हुआ है। इसकी जमीन विवादित होने के बाद क्लस्टर की मंजूरी के लिए स्टीयरिंग कमेटी की बैठक भी नहीं की गई। मिष्ठान कारोबारी और सरकारी महकमा अब तक इस आस में बैठे हैं कि उन्हें कहीं जगह मिले तो इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाए।
ये यूनटि लगेंगी- यहां शुद्ध और प्रामाणिक खोवा, छैना, नमकीन, पनीर, बेसन और मैदा तैयार करने की इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
news fact- लेटलतीफी : स्टीयरिंग कमेटी की बैठक नहीं होने से आगे की कार्रवाई ठप
चार साल से शहर की ‘मिठास’ पर जमीन की ‘कड़वाहट’
15 करोड़ रुपए की लागत से पांच एकड़ में प्रस्तावित क्लस्टर अधर में
केंद्र और राज्य की मिलेगी मदद
केंद्र सरकार की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और सिटी डेवलपमेंट प्लान (सीडीपी) के तहत करीब 15 करोड़ की लागत से मिष्ठान और नमकीन क्लस्टर बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके तहत केंद्र और राज्य सरकारें मदद करेंगी। इसके बाद कारोबारी अपनी इकाइयां स्थापित कर सकेंगे। इस योजना में 25 से अधिक मिष्ठान निर्माता शामिल हैं।
भेजी जा चुकी है डीपीआर
राज्य सरकार की तरफ से इसकी डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है। इसमें योजना से जुड़ी तमाम जानकारी भी है, लेकिन दिल्ली में फरवरी के बाद स्टीयरिंग कमेटी की बैठक नहीं होने के कारण मामला अटका पड़ा है। यह बैठक विकास आयुक्त की ओर से की जाती है।
काम में देरी से निराश
मिष्ठान विक्रेता संघ के अध्यक्ष बंशीलाल गुप्ता और महामंत्री हेमराज अग्रवाल का कहना है, क्लस्टर हमारा सपना है। इसके लिए कई तरह के प्रयास किए गए, तब जाकर डीपीआर केंद्र सरकार तक पहुंची। लेकिन अब आगे के काम में देरी से हम निराश हैं।
क्लस्टर की उपयोगिता
यहां पर दूध से बने उत्पाद तैयार करने के लिए प्लांट और प्रयोगशाला की स्थापना की जाएगी। मसाला और नमकीन बनाने की इकाइयां स्थापित होंगी। जिले में अभी 300 से अधिक मिष्ठान की दुकानें हैं। इसी तरह 30 से अधिक छोटी-बड़ी नमकीन निर्माण इकाई। लेकिन इन्हें शुद्ध कच्चामाल नहीं मिल पाता। क्लस्टर से बनने से यह समस्या दूर हो सकेगी।
अदालत में उलझी जमीन
करीब पांच एकड़ में क्लस्टर बनाया जाना प्रस्तावित है। सीएफसी के लिए पनागर के पास उर्दुआ-खुर्द में करीब तीन एकड़ जमीन जिला उद्योग केंद्र को स्थानांतरित की गई। इसके बाद इस योजना को आगे बढ़ाया जाना था, लेकिन जमीन विवादित होने के बाद मामला न्यायालय में चला गया।
रेडीमेड गारमेंट के लिए भी चाहिए राशि
इधर, लेमागार्डन में तैयार हो चुका रेडीमेड गारमेंट भी बनकर तैयार है। उसकी शुरुआत के लिए सितम्बर का समय तय किया गया है, लेकिन अभी वॉशिंग प्लांट एवं डाइंग प्लांट की मशीनरी के लिए अतिरिक्त राशि की आवश्यकता संचालक मंडल द्वारा बताई गई है। इसकी मांग भी केन्द्र सरकार से की जा रही है। मंजूरी मिलने तक क्लस्टर भी अधूरा पड़ा है।
जमीन मिले तो आगे बढ़े बात
मिष्ठान और नमकीन क्लस्टर के लिए भूमि पहली जरुरत है। जो जमीन तय हुई थी, उस पर विवाद के कारण मामला न्यायालय में है। जिला उद्योग केन्द्र अब दूसरी जमीन मुहैया करवाता है तो फिर आगे की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
- सीएस धुर्वे, प्रबंध संचालक एकेवीएन जबलपुर
व्यापारी पूरी तरह से तैयार
क्लस्टर के लिए स्टेयरिंग कमेटी की बैठक महत्वपूर्ण है। उसमें देरी हो रही है। यह हो सके, इसके प्रयास किए जाने चाहिए। व्यापारी पक्ष की तरफ से पूरी तैयारियां की जा चुकी हैं।
- अखिलेश बलुआपुरी, कंसल्टेंट मिष्ठान एवं नमकीन क्लस्टर