MP News: 4 जुलाई 1999 को मुश्कोह घाटी में पॉइंट 4875 (फ्लैट टॉप) पर एक युवा राइफलमैन और हमलावर टुकड़ी के लीडिंग स्काउट के रूप में उन्होंने दुश्मन के बंकर पर हमला किया। इस दौरान उन्हें सीने और बांह में गोलियां लगीं, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया।
MP News: करगिल युद्ध (1999) में अदम्य साहस और वीरता का प्रदर्शन करने वाले परमवीर चक्र विजेता ऑनरेरी कैप्टन (सूबेदार मेजर) संजय कुमार सोमवार को भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए। मुख्यालय मध्यभारत के अंतर्गत जम्मू और कश्मीर राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर में आयोजित समारोह में सैन्य अधिकारियों और जवानों ने उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी। उन्होंने तीन दशक तक भारतीय सेना में सेवाएं दीं।
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के कलोल बकैन गांव निवासी संजय कुमार(Sanjay Kumar Kargil Hero) 26 जून 1996 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। जबलपुर स्थित जम्मू और कश्मीर राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे 13वीं बटालियन, द जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स में शामिल हुए। वर्ष 1999 के करगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय में उन्होंने असाधारण बहादुरी दिखाते हुए सैन्य इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।
4 जुलाई 1999 को मुश्कोह घाटी में पॉइंट 4875 (फ्लैट टॉप) पर एक युवा राइफलमैन और हमलावर टुकड़ी के लीडिंग स्काउट के रूप में उन्होंने दुश्मन के बंकर पर हमला किया। इस दौरान उन्हें सीने और बांह में गोलियां लगीं, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया। आमने-सामने की लड़ाई में उन्होंने तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। उनकी मशीन गन छीनकर दुश्मन के ठिकानों को ध्वस्त किया। अत्यधिक रक्तस्राव के बावजूद उन्होंने लक्ष्य प्राप्त होने तक अपने साथियों का उत्साह बनाए रखा।
उनकी वीरता के लिए भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने उन्हें देश के सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया था। इस वर्ष 26 जनवरी 2026 को उन्हें ऑनरेरी कैप्टन के पद पर पदोन्नत किया गया। सेवा के दौरान उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला और इंडियन मिलिट्री एकेडमी, देहरादून में प्रशिक्षक के रूप में भी योगदान दिया। सेवानिवृत्ति के मौके पर संजय कुमार ने कहा कि भारतीय सेना और देश की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने कहा कि परमवीर चक्र केवल उनका नहीं, उनकी यूनिट, रेजिमेंट और उन सभी सैनिकों का है जो देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं।