सावन में इस सरल विधि से करें भगवान भोलेनाथ का पूजन
जबलपुर। भगवान भोलेनाथ की अराधना के लिए सावन के महीने का विशेष महत्व है। शास्त्रों में तो यहां तक लिखा है कि इस पावन माह में शिवलिंग में एक लोटे जल चढ़ाने से शिवजी प्रसंन्न हो जाते हैं। पूरे सावन भर भगवान शिव की पूजा आराधना किए जाने का महत्व है। इसके पीछे माना जाता है कि भगवान शिव की रोज पूजा करने से पुण्य फल प्राप्त होते हैं। आईये हम आपको बताते हैं कबसे श्रावण मास शुरु हो रहा है और किस तारीख को सावन सोमवार पड़ रहे हैं।
आराध्य और आराधक का योग
सावन महीने की शुरुआत प्रतिपदा पर शुक्रवार 28 जुलाई से हो रही है। खास बात तो यह है कि शुक्रवार का दिन भगवान शिव के प्रिय दिनों में से एक है। ज्योतिषाचार्य पं. अखिलेश त्रिपाठी के अनुसार शुक्र देव भगवान शिव के परम आराधक थे। इस बार सावन का शुभारंभ शिवजी के आराधक शुक्र देवता के दिन हो रहा है। ज्योतिष में शुक्र को मकान, वाहन, वैभवए लक्ष्मी और सुख-समृद्धि का कारक माना जाता है। इसका सीधा अर्थ है कि इस बार सावन में भगवान शिव की उपासना वैभव और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली रहेगी।
चार होगी सोमवारों की संख्या
सावन का पूरा महीना ही जहां अराधना के लिए विशेष है तो वहीं 4 दिन सावन सोमवार के भी भक्तों के लिए व्रत रखने को मिलेंगे। प्रथम सावन सोमवार 30 जुलाई को, दूसरा 6 अगस्त, तीसरा 13 अगस्त और चौथा सोमवार 20 अगस्त को है। श्रावणी पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन का पावन दिन इस बार 26 अगस्त को आ रहा है। इस दिन भाईयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर बहनें उनके आयुष्य और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।
पूजन में रखें यह ध्यान
- सावन के महीने में शिवलिंग की करें पूजा
- शिवलिंग जहां स्थापित हो पूवज़र्् दिशा की ओर मुख करके नहीं बैठें
- शिवलिंग के दक्षिण दिशा में ही बैठकर पूजन करें
ये होता है अभिषेक का फल
- दूध से अभिषेक करने पर परिवार में कलह, मानसिक पीड़ा में शांति मिलती है।
- घी से अभिषेक करने पर वंशवृद्धि होती है।
- इत्र से अभिषेक करने पर भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
- जलधारा से अभिषेक करने पर मानसिक शान्ति मिलती है।
- शहद से अभिषेक करने पर परिवार में बीमारियों का अधिक प्रकोप नहीं रहता।
- गन्ने के रस की धारा डालते हुये अभिषेक करने से आर्थिक समृद्धि व परिवार में सुखद माहौल बना रहता है।
- गंगा जल से अभिषेक करने पर चारो पुरूषार्थ की प्राप्ति होती है।
- अभिषेक करते समय महामृत्युंजय का जाप करने से फल की प्राप्ति कई गुना अधिक हो जाती है।
- सरसों के तेल से अभिषेक करने से शत्रुओं का शमन होता।
ये भी मिलते हैं फल
- बिल्वपत्र चढ़ाने से कई जन्मों के पापों व रोग से मुक्ति मिलती है।
- कमल पुष्प चढ़ाने से शान्ति व धन की प्राप्ति होती है।
- कुशा चढ़ाने से मुक्ति की प्राप्ति होती है।
- दूर्वा चढ़ाने से आयु में वृद्धि होती है।
- धतूरा अर्पित करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति व पुत्र का सुख मिलता है।
- कनेर का पुष्प चढ़ाने से परिवार में कलह व रोग से निवृत्ति मिलती हैं।
- शमी पत्र चढ़ाने से पापों का नाश होता, शत्रुओं का शमन व भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है।