ये है शिव की सबसे कठिन साधना, मनोकामना शीघ्र पूरी करते हैं महादेव
जबलपुर. सावन माह में भगवान महादेव की उपासना विशेष फलदायी होती है। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु भक्ति की परीक्षा दे रहे हैं। कोई नंगे पांव कांवड़ यात्रा में शामिल हो रहा है तो कोई धरती पर लेटते हुए भगवान के गर्भ गृह तक पहुंचकर जलाभिषेक कर रहा है। जैसे जैसे सावन माह अंतिम दिनों की ओर बढ़ेगा शिव भक्ति के एक से बढकऱ एक नजारे संस्कारधानी में देखने मिलेंगे। यहां देश की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा दिखाई देगी।
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सावन में भोले की भक्ति: नंगे पांव मंदिर पहुंच रहे साधक
कठिन साधना से की जा रही शिव उपासना
शहर में जगह-जगह हो रहे आयोजन गुप्तेश्वर मंदिर से निकलेगी शाही सवारी
सावन के दूसरे सोमवार को ग्वारीघाट में सूर्योदय से पहले ही हजारों कांवडि़ए पहुंच जाएंगे। संतों के सान्निध्य में नर्मदा पूजन के संस्कार कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी। ग्वारीघाट से परशुराम धाम मटामर तक श्रद्धालु अपने कांवड़ के एक ओर नर्मदा जल और दूसरी ओर देववृक्ष स्वरूप पौधे लेकर जाएंगे। वहीं गुप्तेश्वर महादेव मंदिर से दोपहर 12 बजे महाकाल की तर्ज पर संतों के सान्निध्य में शाही सवारी निकाली जाएंगी। जगह-जगह दर्शन-पूजन, आरती की जाएगी।
पार्थिव शिवलिंग निर्माण छह को
शिव महापुराण कथा एवं पार्थिव शिवलिंग निर्माण समिति के तत्वावधान में रामपुर में छह को पार्थिव शिवलिंग निर्माण होगा। संयोजक ओमप्रकाश महावर ने बताया दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर से दोपहर तीन बजे शोभायात्रा निकाली जाएगी। ऐसा माना जाता है कि पार्थिव शिवलिंग निर्माण कर उनका पूजन करने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
पार्थिव शिवलिंग निर्माण सात से
अधारताल स्थित धनी की कुटिया के आगे न्यू राम नगर में सात अगस्त से गृहस्थ संत तरुण चौबे के सान्निध्य में छह दिवसीय रुद्र महायज्ञ एवं पार्थिव शिवलिंग निर्माण होगा। यज्ञ में काफी संख्या में श्रद्धालु पूजन अर्चन करेंगे।