
जबलपुर. आमजन की सेहत के प्रति प्रशासनिक अफसर इतने लापरवाह हो सकते है, शायद इसका कयास प्रशासनिक मशीनरी को नही रहा, तभी तो एक सर्वे के लिए वाहनों में ईंधन तक का इंतजाम कराना गवारा नहीं रहा। लेकिन अब मामला जिले के आला अफसर के पाले में चला गया है। बताया जा रहा है कि कलेक्टर इस मुद्दे पर काफी गंभीर हैं और उन्होंने लापरवाह अफसरों से संबंधित जानकारी तलब कर ली है। जल्द ही बड़ी कार्रवाई संभव है।
बता दें कि दो दिन पहले ही यह तय हुआ था कि लोगों की सेहत की मुकम्मल जानकारी के लिए जिले में सीरो सर्वे कराया जाएगा। सीरो सर्वे का मकसद कोरोना से बचाव के साथ ही अन्य रोगों की जानकारी का पता लगाना था। दरअसल जिस व्यक्ति के अंदर कोई बीमारी हो जाती है तो शरीर में उसके खिलाफ एंटीबॉडी बन जाती है। बहुत से लोगों में बीमारी के लक्षण नहीं दिखते हैं। एंडीबॉडी से समुदाय में इन बीमारियों की प्रसार दर के बारे में पता चलता है। साथ ही कोरोना के सामुदायिक संक्रमण की भी जानकारी हो सकेगी। इसी उद्देश्य से जिले में सीरो सर्वे का फैसला लिया गया था। इसके लिए 40 टीम गठित की गई थी। पर कोई भी टीम ईंधन के अभाव में सर्वे को नहीं निकल पाई।
इसके लिए यह पहले से ही तय था कि सीरो सर्वे के लिए विभिन्न विभागों के वाहनों का उपयोग होगा और संबंधित विभाग ही वाहनों के लिए ईंधन का इंतजाम करेगा। इस संबंध में अपर कलेक्टर हर्ष दीक्षित ने निर्देश जारी किया था। लेकिन उस निर्देश की पूरी तरह से अवहेलना की गई। ऐसे में पहले दिन मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ने जैसे-तैसे डीजल उपलब्ध करा दिया था। लेकिन दूसरे दिन संबंधित विभागों की तरफ से ईधन की व्यवस्था नहीं की गई, जिसके चलते सर्वे नहीं हो सका। हालांकि इसकी जानकारी आला प्रशासनिक अधिकारियों को मिली तो उनका नाराज होना जायज है।
बताया जा रहा है कि सर्वे के लिए वाहनों को तय समय पर शनिवार की सुबह निकलना था। उन वाहनों के साथ सैंपल लेने वाले कर्मचारी व दल के सदस्य भी जाने थे। बावजूद इसके वाहनों में डीजल नहीं होने की वजह से अधिकांश वाहन खड़े ही रहे। इस बात की जानकारी सुबह की पाली में कलेक्टर कर्मवीर शर्मा को हुई तो उन्होंने नाराजगी जताते हुए तत्काल जिन विभागों ने वाहनों में डीजल की व्यवस्था नहीं की है उनकी जानकारी तलब कर ली है। अब लापरवाह अफसरों पर गाज गिरनी तय है क्योंकि सीरो सर्वे प्रदेश शासन की प्राथमिकता में शामिल है।