जबलपुर

shani jayanti 2018: नर्मदा तट के सिद्ध शनि मंदिर, जहां होती है हर मुराद पूरी

नर्मदा तट के सिद्ध शनि मंदिर, जहां होती है हर मुराद पूरी  

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May 13, 2018
shani dev ki puja kaise karni chahiye

जबलपुर। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या मंगलवार को शनि जयंती विशेष योग में मनाई जा रही है। शनि की उपासना से बाधाएं दूर होंगी, सुख सृमृद्धि आएगी। वहीं अमावस्या के दिन शनिदेव के पिता सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, उनके तेवर तल्ख रहेंगे। मंगलवार को होने से शनि की क्रूरता कम होगी। इसके अलावा वट सावित्री व्रत भी सौभाग्यवती महिलाओं ने रखा है और वे पति परिवार की सुख शांति के लिए पूजन वंदन करेंगी। शनि जयंती पर हो सकती है बड़ी दुर्घटना, ज्योतिषाचार्यों ने जताई ये शंका

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अद्र्धरात्रि की साधना
ज्योतिर्विद जनार्दन शुक्ल के अनुसार अद्र्धरात्रि की साधना ज्यादा सार्थक होगी। हनुमान गढ़ी ग्वारीघाट के पुजारी श्याम दुबे ने बताया कि युद्ध में लहूलुहान हुए शनिदेव के घाव भरने के लिए बजरंगबली ने उन्हें तेल दिया था। तेलाभिषेक से शनि प्रसन्न होते हैं। शनि देव गुरु की गोचर राशि से वक्री होकर मंगल की वृश्चिक राशि में हैं। इस कारण समाज में और राष्ट्र में कई दुर्घटनाएं हो रही हैं।

शनि कुंड और नील पर्वत
लम्हेटाघाट में शनि कुंड है। इतिहासविद राजकुमार गुप्ता बताते हैं कि मान्यताओं में शनिदेव नर्मदा तट पर आए थे। जहां शनि का परिमार्जन हुआ, उसे शनि कुंड कहते है। इसमें स्नान और नील पर्वत की पूजा से कष्ट दूर होते हैं। वहीं ग्वारीघाट टैगोर रोड काल भैरव मंदिर में शनि देव की मूर्ति स्थापना व महाआरती की जाएगी। सुबह अभिषेक व शाम 5 बजे आरती की जाएगी। धनवंतरिनगर स्वयं सिद्ध श्री लाल बाबा मंदिर प्रांगण शनि मंदिर में सुबह 7 बजे अभिषेक व शाम 5 बजे नेत्र चिकित्सा शिविर लगेगा। प्राचीन शनि मंदिर गोहलपुर में सुबह से शाम तक हवन, पूजन होगा। नर्मदा तट स्थित शनि प्रतिमा गोपालपुर में विशेष पूजन होगा।

Published on:
13 May 2018 09:48 am
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