Shivling : बहुत ख़ास हैं ये नर्मदेश्वर शिवलिंग, बिना प्राण प्रतिष्ठा होती है पूजा
Shivling : मां नर्मदा में पाया जाने वाला हर कंकर शंकर कहलाता है। पुराणों में इसकी पूर्ण व्याख्या भी मिलती है। यही वजह है कि यहां के शिवलिंग न केवल जिले, प्रदेश बल्कि देश के अन्य प्रदेशों से लेकर विदेशों तक में डिमांड में रहते हैं। वैसे तो इनकी डिमांड पूरे साल रहती है, लेकिन सावन माह में सबसे ज्यादा मांग हो जाती है। इन दिनों शहर के नर्मदेश्वर शिवलिंग ले जाने वाले बड़ी संख्या में भेड़ाघाट पहुंच रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार घरों में पूजन से लेकर मंदिरों तक के लिए नर्मदेश्वर शिवलिंग की डिमांड आ रही है। कुछ अभी ले जा रहे हैं तो बहुत से लोगों ने ऑर्डर देकर अपने अनुसार बनवा रहे हैं जिनकी डिलेवरी सावन माह में शुरू हो जाएगी।
स्थानीय व्यापारी सुनील जैन ने बताया सावन में सबसे ज्यादा नर्मदेश्वर शिवलिंग की मांग हर साल देखी जाती है। इसकी तैयारियां गर्मी के दिनों से ही शुरू हो जाती है। भेड़ाघाट में 200 रुपए से 2 लाख रुपए तक के शिवलिंग लोग ले रहे हैं। बड़े शिवलिंग मंदिर के साइज के अनुसार भी तैयार किए जा रहे हैं। सावन में लोग घर के पूजन स्थान और पारिवारिक मंदिरों के लिए नर्मदेश्वर शिवलिंग मांगते हैं। ये सभी शिवलिंग नर्मदा से निकले पत्थरों से तैयार होते हैं, जिनमें थोड़ा बहुत काम करके एक आकार बस निश्चित किया जाता है।
भेड़ाघाट में एक रहस्यों से भरा कुंड मौजूद है, जहां की खासियत है कि उसका हर पत्थर गोल है यानि कोई कोण या नुकीलापन नहीं होता है। लोग इसे जहां विज्ञान से जोड़ते हैं तो वहीं पुराणों में इसे सिद्ध शिवलिंग निर्माण करने वाले कुंड के रूप में बताया गया है। बाण कुंड नौकायन स्थल पंचवटी और धुआंधार के बीच मौजूद है। छोटी सी पगडंडी रूपी सडक़ से होकर यहां पहुंचा जा सकता है। इस कुंड में पूरे साल पानी भरा रहता है, यहां का हर पत्थर शिवलिंग का आकर लिए हुए है जो पर्यटकों व रोमांच के शौकीनों को आकर्षित करता है।
कुंड धुआंधार से पंचवटी की ओर बहती नर्मदा के बीच में पड़ता है। पूर्व से पश्चिम की ओर बहती नर्मदा जब बारिश के दौरान तीव्र वेग से आगे बढ़ती है तो इस कुंड में एक ओर से प्रवेश करती है। जिससे पानी इतना तेज घूमता है कि उसमें कई कई क्विंटल वजनी पत्थर भी धूमने लगते हैं, जो कि आपस में टकराकर अपनी धार या कोना खो देते हैं। घूमने और टकराने में अधिकतर पत्थर शिवलिंग का आकार ले लेते हैं। जो पानी कम होने पर आसानी से देखे जा सकते हैं।