कुम्भ राशि में प्रवेश करेंगे सूर्य, बुध और शुक्र भी उसी राशि में
जबलपुर. फाल्गुन में 14 दिन ग्रहों की कुम्भ संक्रांति रहेगी। यह योग 13 फरवरी महाशिवरात्रि से प्रारम्भ होगा। ज्योतिर्विदों के अनुसार इसमें नए कार्यों का विशेष योग है। इस संयोग से महाशिवरात्रि में भगवान शिव का अभिषेक विशेष फलदायी होगा। वहीं 14 से बुद्धादित्य योग बन रहा है। आचार्य डॉ. सत्येन्द्र स्वरूप शास्त्री के अनुसार कुम्भ संक्रांति में वाहन खरीदना, पश्चिम दिशा की यात्रा की शुरुआत, लोहे के सामान खरीदना, नई औषधि का कार्य, गोमेद आभूषण धारण करना, बच्चे को ऊपर का दूध पिलाना सहित अन्य नए कार्य शुरू करना शुभ है।
एेसा रहेगा ग्रहों का संयोग
सूर्य ग्रह 13 फरवरी दोपहर 1.04 बजे कुम्भ राशि में प्रवेश करेंगे। जबकि 14 फरवरी को सुबह 6.44 बजे बुध भी कुम्भ राशि में जाएंगे। शुक्र ग्रह भी कुम्भ राशि में रहेंगे। कुम्भ राशि के स्वामी शनि ग्रह हैं। शनि के मित्र ग्रह बुध और गुरु शुक्र कुम्भ राशि हैं। जबकि बुध ग्रह सूर्य के भी मित्र हैं। ग्रहों के संयोग से कुम्भ संक्रांति बन रही है। वैसे तो सूर्य और शनि परस्पर विरोधी ग्रह हैं, लेकिन शुक्र और बुध ग्रह को भी कुंभ राशि में होने पर विशेष योग बन रहा है। वहीं 22 फरवरी को होलाष्टक शुरू हो रहे हैं।
अपने सद्कर्मों से उबरता है व्यक्ति
नरसिंह मंदिर में स्वामी श्याम देवाचार्य के प्रवचन
जबलपुर. अच्छे लोगों के कर्मों का फल कभी समाप्त नहीं होता है। जिसने अच्छे कर्म किए हों, उसे कभी भी कहीं भी, किसी भी अवस्था में अच्छाई का प्रतिफल मिलता ही है। कोई व्यक्ति जब डूबता हुआ होता है तो उसके सद्कर्म ही उसे बचाते हैं। नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज गोरखपुर में श्रीमद् भागवत कथा में जगद्गुरु डॉ. स्वामी श्यामदेवाचार्य ने ये उद्गार व्यक्त किए। इस अवसर पर डॉ. स्वामी नरसिंहदास, मधुसूदनदास मालपाणी, जगदीश सिंह, सरला सिंह ठाकुर, उमा ठाकुर, अशोक मनोध्या, शरद दुबे, श्यामसाहनी, पंकज पाण्डे, श्रीमती सावित्री उपाध्याय, श्रीमती वीणा तिवारी, जगत बहादुरसिंह अन्नू, गुलशन मखीजा, कल्लू रजक, प्रवेश खेड़ा, विद्धेश भापकरसिंह उपस्थित थे। भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष एकता एल्कर, अश्विनी परांजपे एवं लवनील आनंद कथा में उपस्थित थीं।
श्रीकृष्ण जन्म उत्सव मनाया
कथा के अंतिम समय पर शाम 6.30 बजे श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण को भोगप्रसाद, गुड़ के लड्डू, माखन-मिश्री का भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।