जबलपुर

एमपी में ओबीसी को 27 प्रतिशत रिजर्वेशन का पेंच: शीर्ष कोर्ट ने पूर्व आदेश में किया संशोधन

OBC- ओबीसी आरक्षण: दो केस सुनेगा सुप्रीम कोर्ट, बाकी 52 पर हाईकोर्ट में दो अप्रेल को सुनवाई

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Mar 31, 2026
ओबीसी आरक्षण: दो केस सुनेगा सुप्रीम कोर्ट, बाकी 52 पर हाईकोर्ट में दो अप्रेल को सुनवाई (File Photo)

OBC- मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी को 27 प्रतिशत रिजर्वेशन का पेंच अभी खुल नहीं पा रहा है। इस केस में देश की शीर्ष कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में संशोधन किया है। इसके अंतर्गत एमपी में ओबीसी आरक्षण से संबंधित दो केस सुप्रीम कोर्ट सुनेगा जबकि बाकी केस की सुनवाई हाईकोर्ट में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं को जबलपुर हाईकोर्ट भेज दिया था। मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी को आरक्षण 27 प्रतिशत करने के तत्कालीन कांग्रेस सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में कुल 103 याचिकाएं दायर हुईं थीं। इनमें 54 याचिकाओं में से सुप्रीम कोर्ट ने 2 को री-कॉल किया है। शीर्ष कोर्ट ने दीपक पटेल बनाम मप्र शासन व हरिशंकर बरोदिया बनाम मप्र शासन के मामलों की सुनवाई के लिए बुलाया है। इन दोनों केस पर हाईकोर्ट की बजाए सुप्रीम कोर्ट ही सुनवाई करेगा।

प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व का आदेश संशोधित कर दिया है। शीर्ष कोर्ट ने जिन याचिकाओं को हाईकोर्ट भेजा था अब उनमें से दो याचिकाओं को वापस सुनवाई के लिए मंगा लिया है। बाकी 52 याचिकाओं की सुनवाई जबलपुर हाईकोर्ट में अब दो अप्रेल को होगी।

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ओबीसी को 27 प्रतिशत देने पर कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा

तर्क दिया गया कि इंदिरा साहनी केस के अनुसार आरक्षण किसी भी स्थिति में 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने पर यह 50 प्रतिशत से ज्यादा होता है। सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में हुई, लेकिन सरकार 54 याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ले गई।

दीपक पटेल बनाम मप्र शासन व हरिशंकर बरोदिया बनाम मप्र शासन के मामलों की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में

सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को याचिकाओं को मप्र हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई के लिए भेजा। इस पर एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने रिव्यू याचिका लगाई। इस पर सुनवाई के बाद इन 54 याचिकाओं में से दो को सुप्रीम कोर्ट ने वापस सुनवाई के लिए री-कॉल किया है। दीपक पटेल बनाम मप्र शासन व हरिशंकर बरोदिया बनाम मप्र शासन के मामलों की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में होगी। शीर्ष कोर्ट ने शेष मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में ही करने की बात कही है।

कमलनाथ सरकार ने मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का फैसला किया

बता दें कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का फैसला किया था। शासन के इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। तब से मामला कोर्ट में लंबित है।

Published on:
31 Mar 2026 06:38 am
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