जबलपुर

वे भी क्या दिन थे … घर से पूड़ी-सब्जी ले जाते थे कार्यकर्ता, अब केटरिंग वाले ले रहे ठेका

जबलपुर जिले में बदल गया है प्रचार का तरीका    
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Updated: 8 Apr 2024, 6:34 PM IST
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जबलपुर। समय के साथ चुनाव का परिदृश्य भी बदल गया है, एक समय था जब नेताजी के प्रचार में जाने वाले कार्यकर्ता अपने घर से पूड़ी सब्जी बनवा कर ले जाते थे। जिस गांव में भोजन के लिए रुकते थे वहां भी पार्टी के कार्यकर्ता मिलजुल कर भोजन की व्यवस्था किया करते थे। कार्यकर्ता के घरों के लोग काम में जुट जाते थे, जिससे पार्टी कार्यकर्ता और उनके परिजनों का पार्टी से जुड़ाव बढ़ता था। काम करने की ललक रहती थी, उत्साह नजर आता था। अब यह सब देखने को नहीं मिलता।

प्रचार के दौरान भोजन पानी की व्यवस्था के लिए केटरिंग वालों को ठेका दे दिया जाता है, वे पूड़ी सब्जी के पैकेट तैयार कर देते हैं या जहां पड़ाव होता है वहीं व्यवस्था कर दी जाती है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सर्वेश्वर चमन श्रीवास्तव बताते हैं कि प्रचार के लिए बमुश्किल उम्मीदवार के लिए एक जीप हुआ करती थी, वाहन की व्यवस्था भी कुछ परिचित अथवा धनाढ्य वर्ग के लोग करते थे। कार्यकर्ता व छोटे नेता साइकिलों से या पैदल गांव गांव जाकर प्रचार करते थे।

रात रात भर मेहनत करते थे कार्यकर्ता

जब तक प्रिंटेड मतदाता पर्ची शुरू नहीं हुईं थी तब पार्टी के लोग 15-15 दिन पहले से मतदाताओं की पर्चियां हाथ से लिखा करते थे। रात -रात भर काम होता था। इसका फायदा यह था कि क्षेत्रीय कार्यकर्ता वहां के हर मतदाता के बारे में जानकारी रखता था। यही लोग पोलिंग स्टेशन पर ड्यूटी करते थे। इसका लाभ पार्टी को मिलता था।

गेरू घोलकर लिखते थे दीवारों पर

जब दीवारों पर प्रत्याशी का प्रचार लिखने पर चुनाव आयोग की रोक नहीं थी तो कार्यकर्ता घरों में गेरू घोलकर खुद ही दीवारों पर लिखते थे, कपड़ों के बैनर पर भी लिखने में काफी मेहनत होती थी यह काम पार्टी के कुछ ऐसे लोग करते थे जो इसमें एक्सपर्ट होते थे। अब बैनर फ्लैक्स का जमाना है सब कुछ आसानी से हो जाता है।

गर्मी में जेब में प्याज रख कर चलते थे

भीषण गर्मी में लू-लपट के बीच कई बार चुनाव हुए हैं। तापघात से बचने जेब में प्याज रखते थे और घर-घर प्रचार करते थे। गांव में पार्टी के लोग प्रचार करने वालों के लिए आम के पना, बेल के शर्बत, सत्तू आदि की भी व्यवस्था कर देते थे। गमछा बांधे कार्यकर्ता विषम परिस्थितियों में समर्पण से काम करते थे। अब हर कार्यकर्ता नेताजी के साथ एसी गाड़ी में घूमना चाहता है।

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