
जबलपुर। दीपावली पर पटाखों का बारूद जलने से हुआ ध्वनि व वायु प्रदूषण कई लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है। ऐसे में पटाखों का शोर सीमित नहीं कर पाने की स्थिति में लोगों को कई बीमारियां घेर सकती है। हृदय रोग के मरीज, छोटे बच्चे, गभर्वती महिलाएं तेज ध्वनि से सहम जाते हैं। सबसे ज्यादा खतरा पटाखों के शोर के साथ उनके जलने पर निकलने वाले धुएं का है। इन पटाखों से निकलने वाले धुएं के संपर्क में आने पर बच्चों को अस्थमा का रोग हो सकता है। महिला और बुजुर्ग भी सांस की बीमारियों से पीडि़त हो सकती है।
50 डेसिबल तक कम हो जाएगा प्रदूषण
पटाखे जलने से हुआ ध्वनि प्रदूषण अस्थमा और श्वास के मरीजों की मुसीबत बढ़ा देता है। वैज्ञानिकों का आकलन है कि दीपवली पर अगर प्रदूषण रहित पटाखे जलाए जाएंगे तो ध्वनि प्रदूषण 50 डेसिबल तक कम हो जाएगा। वायु प्रदूषण में 100 माइक्रोग्राम प्रति घटमीटर तक कमी आ सकती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार जबलपुर में 118 से 120 डेसिबल तक के पटाखे आए हैं।
शहर में इन स्थानों पर होगा प्रदूषण का आंकलन
अधारताल
विजय नगर
जीआरपी मैदान के समीप
अभी कोई दिशा-निर्देश नहीं है
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वैज्ञानिक एसके खरे के अनुसार जबलपुर में दीपावली के अवसर पर जलने वाले पटाखों से प्रदूषण का स्तर निर्धारित सीमा से कम रहता है। अगर प्रदूषण रहित पटाखे बनते हैं तो ध्वनि प्रदूषण 50 डेसिबल तक कम हो सकता है, वायु प्रदूषण में भी कमी आ सकती है। हालाकि अभी इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।
एेसे समझें ध्वनि प्रदूषण (डेसिबल में)
क्षेत्र दिन में रात में
औद्योगिक 75 70
व्यवसायिक 65 55
रहवासी 55 45
साइलेंस 50 40
दीपावली पर 90 110 से 120 तक
लिमिट 125 डेसिबल तक
वायु प्रदूषण का स्तर (माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर) आम दिनों में
क्षेत्र प्रदूषण
रहवासी 105 से 110
व्यवसायिक 80 से 100
दीपावली पर 110 से 120
पीसीबी ने की अपील
125 डेसिबल से ज्यादा पटाखा न जलाएं
पटाखा जलाते वक्त न्यूनतम 4 मीटर की दूरी पर खड़े रहें
रात 10 से सुबह 6 बजे तक पटाखे जलाना प्रतिबंधित है
पटाखे जलाने के बाद कचरा प्राकृतिक जलस्रोत, पेयजल स्रोत के आसपास न फे कें
पटाखा का कचरा अलग से रखें व नगर निगम के सफाईकर्मियों को सौंपे
साइलेंट जोन अस्पताल, हाईकोर्ट, कलेक्ट्रेट व फै क्ट्रियों के आसपास पटाखे न जलाएं