
जबलपुर। कड़कड़ाती ठंड में जबलपुर में भी खुले आसमान के नीचे रात गुजारने वालों को नींद कैसे आती होगी, यह तो वे ही जानें। लेकिन, इंदौर में भिखारियों के साथ अमानवीयता सामने आने के बाद पूरे मप्र में प्रशासन की नींद टूटी है। इसके चलते जबलपुर कलेक्टर भी देर रात बेसहारा लोगों को हाल-चाल जानने निकले। उन्होंने कुछ मजबूरों से बात की। उन्हें सलाल दी कि वे रैनबसेरों में जाएं। उनके हटते ही फुटपाथ पर रात बिताने वालों ने कहा कि साहब तो आज निकले हैं। ठंड में इस तरह रात बिताने वाले तो पूरे सीजन ऐसे ही रहते हैं। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा टीम के साथ निकले तो फुटपाथ पर सोता मिला तो कोई पेड़ों के नीचे। किसी के अंग पर पतला कम्बल था तो कुछ लोग जाड़े से कंपकंपा रहे थे। कलेक्टर हाईकोर्ट के पास कचहरी वाले बाबा की दरगाह के सामने पहुंचे, तो वहां एक बुजुर्ग सहित अन्य लोगों से कहा कि वे रैन बसेरे में जाकर रहें।
कलेक्टर शर्मा एवं नगर निगम आयुक्त अनूप कुमार ङ्क्षसह ने करीब 50 लोगों को रैन बसेरा पहुंचवाया। कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त के साथ अलग-अलग स्थानों का निरीक्षण किया। उन्होंने खुले में सोने वाले निराश्रित, बेसहारा और भिक्षुकों से चर्चा की एवं उन्हें तत्काल ही बस एवं अन्य वाहनों से रैन बसेरों तक पहुंचाने की व्यवस्था कराई।
ठंड में बेसहारा लोगों को दिलाया जाए आसरा
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन, आयुक्त नगर निगम को पत्र लिखकर बेसहारा फुटपाथ एवं सड़क किनारे गुजर बसर करने वालों को आसरा दिलाने की मांग की है। मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे, रजत भार्गव, डॉ. अहमद खान ने कहा है कि इंदौर जैसी स्थिति शहर में भी बनी है। ठंड से बचने के लिए बेघरबार लोगों के लिए कोई आसरा नहीं हैं। शासन से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।