
जबलपुर। आपने अभी तक मिट्टी, आटे, अनाज से बने गणपति देखे और सुने होंगे, लेकिन हमारे आसपास ऐसी तमाम चीजें हैं, जिनका उपयोग करके भी कलाकृतियां बनाई जा सकती हैं। इसका उदाहरण गृहिणी ज्योति साहू ने पेश किया है। उन्होंने बची हुई लिपस्टिक, भुट्टे के बाल, कागज, चूडिय़ां, गिट्टी, रेत, बुरादा, पेंसिल के कचरे, माचिस से गणपति की तस्वीर उकेरी हैं। ज्योति ने बताया कि अभी तक उन्होंने गणेशजी की दो सौ कलाकृतियां तैयार की हैं, जिसमें उन्होंने आसपास मिलने वाले वेस्ट मटेरियल का इस्तेमाल कर गणेशजी की आकृति बनाई है। यह उनकी पूरे 8 साल की मेहनत है। ज्योति बताती हैं कि यह सारी कलाकृतियां उन्होंने शादी के बाद ही बनाई हैं।
इन इन चीजों से तैयार किए गणपति
- बची हुई लिपस्टिक,
- भुट्टे के बाल
- डॉट पेंटिंग
- कागज
- चूडिय़ां,
- गिट्टी
- रेत
- बुरादा
- पेंसिल के कचरे
- सुतली
- स्टोन
- सिक्वेंस
सपने में आते थे लम्बोदर
ज्योति बताती हैं कि सभी भगवानों में उनके फेवरेट लंबोदर हैं। अक्सर सपने में गणेशजी को ही देखती थीं। एक बार वह चंडीगढ़ के पार्क घूमने गई, जहां वेस्ट मटेरियल से गार्डन तैयार किया गया है। वहीं से उन्हें इंस्पिरेशन मिली कि क्यों ना वह भी वेस्ट मटेरियल से कुछ चीजें बनाएं। उन्होंने अपने फेवरेट बप्पाजी को चुना और तमाम नई-नई चीजों से उनकी आकृतियां उकेरी। इस तरह तकरीबन 200 आकृतियां तैयार हो गई हैं।
कला वीथिका में लगाई प्रदर्शनी
ज्योति साहू ने एकल कलाकृति प्रदर्शनी लगाई। रानी दुर्गावती संग्रहालय की कला वीथिका में उन्होंने यह प्रदर्शनी मंगलवार से लगाई और 200 चित्र प्रदर्शन के लिए रखे गए। शुभारंभ महापौर स्वाति गोडबोले ने किया। यह प्रदर्शनी बुधवार को भी दिन भर खुली रहेगी। मंगलवार को प्रदर्शनी देखने सुबह से लोग निकल पड़े। दिन भर लोग प्रदर्शनी को देखते रहे। इसमें युवक-युवतियों के साथ बुजुर्गो की भी संख्या रही। युवाओं ने कलाकृतियों को देखकर काफी सराहा। बुधवार को भी काफी संख्या में लोग कलाकृति को देखने पहुंचेगे। ज्योति साहू ने कहा कि लोग प्रदर्शनी को देखकर काफी उत्साह दिखा रहे हैं। इससे मन में आत्मसंतुष्टि की भावना जागृत हो रही है।