
जबलपुर। ‘ताईयो नो तमागो’ आम अब पकने को है। ऐसे में सबकी निगाह अब डगडगा हिनौता स्थित बगीचे पर टिकी हैं। पिछले साल इस बगीचे से कई आम चोरी हो गए थे। इस बार भी 21 हजार रुपए नग तक की बोली लगने के बाद बागवान संकल्प सिंह परिहार ने आम की सुरक्षा कड़ी कर दी है। आम की रखवाली के लिए गार्ड व जर्मन शेफर्ड कुत्ते लगा दिए गए हैं। वे शिफ्टवार दिन-रात पहरा दे रहे हैं। जापानी किस्म के स्वादिष्ट रसभरे आम की मेट्रो सिटी में सबसे ज्यादा डिमांड है। मुम्बई के कई बड़े उद्योगपति ‘ताईयो नो तमागो’ आम की मांग कर चुके हैं। हालांकि बगीचे के मालिक ने इस बार भी आम बेचने से मना कर दिया है।
गार्ड व कुत्ते कर रहे ‘ताईयो नो तमागो’ आम रखवाली
ये आम ऐसे खास-
आम की देश में कई किस्म हैं, जो बाजार में 50 से लेकर 150 रुपए किलो तक आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन ‘ताईयो नो तमागो’ आम देखने में खूबसूरत होने के साथ ही बहुत ही स्वादिष्ट और रसदार होता है। महंगा होने के कारण ‘ताईयो नो तमागो’ आम ज्यादातर बड़े उद्योगपति ही खाते हैं। यहां तक कि वे सबसे महंगे आम को खाना अपनी शान समझते हैं। खास बात तो ये है कि उद्योगपति एक साथ कई किलो आम खरीदकर अपने रिश्तेदारों को भी पहुंचाते हैं।
ऐसे हुई थी शुरुआत-
चरगवां मार्ग स्थित डगडगा हिनौता में किसान संकल्प ने चोंसा, बादाम, हापुस, मल्लिका, लंगड़ा जैसी कई देसी किस्मों से लेकर 6 विदेशी किस्म के भी आम लगाए हैं। उनके दो बगीचों में 12 एकड़ में आम के साढ़े तीन हजार पेड़ लगे हैं। संकल्प ने डेढ़ साल देशभर में घूमकर आम की खेती पर अध्ययन किया। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में वर्ष 2013-14 में पौधरोपण की शुरुआत की थी। 2015 से पेड़ों में फल आना शुरू हो गया। खास बात ये है कि संकल्प पेड़ में ही आम पकाते हैं। इसके कारण ये फल बाजार में मिलने वाले आम से ज्यादा स्वादिष्ट होते हैं।