CG Tourism: कुम्हड़ाकोट में विकसित जनजातीय गौरव वाटिका आज प्रकृति, जनजातीय संस्कृति और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुकी है।
CG Tourism: कुम्हड़ाकोट क्षेत्र में स्थित जनजातीय गौरव वाटिका आज बस्तर की जनजातीय विरासत, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का जीवंत प्रतीक बन चुकी है। कभी यह क्षेत्र आरक्षित वनखण्ड का हिस्सा होते हुए भी उपेक्षा, अतिक्रमण और कचरे के अंबार के कारण डंपिंग ग्राउण्ड में बदल गया था। वहीं आज हरियाली, शांति और सौंदर्य का वातावरण देखने को मिलता है।
इस परिवर्तन की शुरुआत तब हुई जब बस्तर वनमण्डल ने इस उपेक्षित भूमि को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। समाज के सभी वर्गों, विशेषकर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से इस क्षेत्र का कायाकल्प किया गया। वर्षों से जमा कचरे को हटाकर भूमि को सुरक्षित किया गया और चारों ओर सुरक्षा दीवार का निर्माण किया गया। वाटिका में 1700 मीटर लंबा नेचर ट्रेल बनाया गया है, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। बीचों-बीच निर्मित तालाब और उसका सुंदर आईलैंड पर्यटकों को सुकून भरे पल बिताने का अवसर प्रदान करते हैं।
यहाँ औषधीय पौधों, फलदार वृक्षों, फूलों की क्यारियों और विभिन्न प्रजातियों के बाँस का रोपण किया गया है, जिससे पूरा परिसर हराभरा और सुगंधित बना रहता है। स्वास्थ्य और मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए योग चबूतरा, योग शेड और ओपन जिम जैसी सुविधाएँ विकसित की गई हैं। पाँच भव्य पैगोडा और आकर्षक ब्रिज इस स्थल की सुंदरता को और बढ़ाते हैं। प्रवेश द्वार पर पार्किंग और स्वच्छ प्रसाधन की सुविधा इसे एक व्यवस्थित पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करती है।
इस वाटिका की सबसे प्रेरक विशेषता है महिला सशक्तिकरण। यहाँ का संपूर्ण संचालन 20 महिलाओं के समूह कर रही है। ‘जंगल कैन्टीन’ में महिला स्व-सहायता समूह पारंपरिक और स्थानीय व्यंजन परोसते हैं। अब तक दस हजार से अधिक पर्यटक यहाँ आ चुके हैं और महिला समूह लगभग दो लाख रुपए की आय अर्जित कर चुका है। यह पहल न केवल स्वरोजगार का माध्यम बनी है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भरता और सम्मान भी प्रदान कर रही है।
पूरी वाटिका को ‘इको-फ्रेंडली’ और ‘प्लास्टिक फ्री जोन’ के रूप में विकसित किया गया है। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है। जहाँ कभी कचरे की बदबू थी, वहाँ आज हरियाली शहर के लिए ‘‘फेफड़ों’’ का कार्य कर रही है। जनजातीय गौरव वाटिका वास्तव में ‘‘गार्बेज से गौरव’’ तक की प्रेरणादायी यात्रा हैएक ऐसा परिवर्तन जो दिखाता है कि सामूहिक प्रयास, ²ढ़ संकल्प और सही दिशा में की गई पहल किसी भी उपेक्षित स्थान को विकास और गर्व का केंद्र बना सकती है।