CG News: केंद्र सरकार की ऑपरेशन कागार अभियान और राज्य सरकार की पुनर्वास नीतियों की सफलता के रूप में देखा जा रहा है। पल्लूरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रना तेलंगाना में नक्सल संगठन के सबसे सीनियर कैडरों में से एक थे।
CG News: नक्सली संगठन को एक और करारा झटका लगा है। तेलंगाना के दो सबसे वरिष्ठ नक्सली नेताओं ने मंगलवार को राज्य पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। केंद्रीय समिति सदस्य पल्लूरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रना (64) और तेलंगाना राज्य समिति सदस्य बंडी प्रकाश उर्फ प्रभात (55) ने हैदराबाद में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी. शिवाधार रेड्डी के समक्ष सरेंडर किया।
यह आत्मसमर्पण केंद्र सरकार की ऑपरेशन कागार अभियान और राज्य सरकार की पुनर्वास नीतियों की सफलता के रूप में देखा जा रहा है। पल्लूरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रना तेलंगाना में नक्सल संगठन के सबसे सीनियर कैडरों में से एक थे। 1980 में रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (आरएसयू) से जुडऩे के बाद वे 45 वर्षों से नक्सल संगठन में काम कर रहे थे। पेद्दापल्ली जिले के रहने वाले चंद्रना पर अलग-अलग राज्यों में मिलकार करीब 1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था।
वे संगठन के प्रमुख रणनीतिकारों में शुमार था और किशनजी जैसे नेताओं के साथ काम कर चुके था। सरेंडर के बाद उसने कहा कि उनका विचारधारा से कोई विरोध नहीं है, लेकिन वे अब मुख्यधारा में रहकर विकास और शांति के प्रयासों में योगदान देना चाहते हैं। वे लम्बे समय से छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में सक्रिय रहें है।
इसी तरह, बंडी प्रकाश उर्फ प्रभात मंचेरियाल जिले के मूल निवासी हैं, जो स्कूल के दिनों से ही नक्सल आंदोलन से जुड़े थे। 42 वर्षों से सक्रिय प्रकाश राज्य समिति के महत्वपूर्ण सदस्य थे और 2004 की शांति वार्ताओं में भाग ले चुके थे। उन पर 40 लाख रुपए का इनाम था। दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य समस्याओं और वैचारिक मतभेदों का हवाला देते हुए सरेंडर का फैसला लिया।
सुकमा। छत्तीसगढ़ के पहले नक्सल मुक्त घोषित ग्राम पंचायत बड़ेशेट्टी से महज चार किलोमीटर दूर नक्सलियों द्वारा लगाया गया 40 किलो वजनी आईईडी बम सुरक्षा बलों ने बरामद कर सुरक्षित रूप से डिफ्यूज कर दिया। यह बम पक्की डामर सड़क के बीचों-बीच लगाया गया था। यह घटना फुलबगड़ी थाना क्षेत्र में हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार को फुलबगड़ी-बड़ेशेट्टी मार्ग पर सर्चिंग के दौरान सुरक्षा बलों को संदिग्ध वस्तु दिखाई दी। जांच में पता चला कि यह शक्तिशाली आईईडी विस्फोटक है, जिसे नक्सलियों ने फोर्स को निशाना बनाने की नीयत से वर्षों पहले प्लांट किया था। सुरक्षा बलों ने तत्काल बम डिस्पोजल टीम को बुलाया और कड़े सुरक्षा घेरे में नियंत्रित ब्लास्ट कर बम को नष्ट किया गया। इस कार्रवाई में जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ के जवानों की अहम भूमिका रही।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नक्सली अक्सर सड़क के नीचे तीन से चार फीट गहराई में बम लगाकर छोड़ देते हैं, ताकि गश्त के दौरान किसी भी समय विस्फोट कर सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाया जा सके। लेकिन इस बार जवानों की सतर्कता से उनका मंसूबा नाकाम रहा।