Bastar Model Code of Conduct: छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय उप-निर्वाचन 2026 की घोषणा के साथ ही बस्तर जिले में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है।
Bastar By-Election 2026: छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय उप-निर्वाचन 2026 की समय-सारणी घोषित किए जाने के साथ ही बस्तर जिले में चुनावी आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। निर्वाचन की प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से बस्तर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी आकाश छिकारा द्वारा जारी आदेश के तहत नगर पालिक निगम जगदलपुर के अंतर्गत आने वाले इंदिरा गांधी वार्ड क्रमांक-16 में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 लागू कर दी गई है।
उक्त आदेश के बाद अब संबंधित वार्ड क्षेत्र में बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार की सार्वजनिक सभा, रैली या जुलूस का आयोजन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। यदि कोई भी पक्ष चुनावी कार्यक्रम या आमसभा आयोजित करना चाहता है, तो उसे कार्यक्रम से कम से कम 48 घंटे पहले संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय दंडाधिकारी या कार्यपालिक दंडाधिकारी के समक्ष लिखित आवेदन प्रस्तुत कर विधिवत अनुमति प्राप्त करनी होगी। किसी भी आमसभा या रैली में शामिल होने वाले व्यक्तियों के लिए किसी भी प्रकार के शस्त्र, धारदार हथियार या लाठी लेकर चलना अथवा उनका सार्वजनिक प्रदर्शन करना पूर्णतः वर्जित होगा।
चूंकि निर्वाचन की घोषणा के बाद व्यक्तिगत सुनवाई का समय नहीं था, इसलिए जिला प्रशासन ने इसे एकपक्षीय आदेश के रूप में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। यह प्रतिबंध उप-निर्वाचन 2026 की पूरी चुनावी प्रक्रिया के संपन्न होने तक प्रभावी रहेगा और उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा रायपुर नगर पालिक निगम के अंतर्गत आने वाले इंदिरा गांधी वार्ड (वार्ड क्रमांक 16) के लिए उप-निर्वाचन 2026 के कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई है। निर्वाचन की अधिसूचना के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है, जिसे ध्यान में रखते हुए बस्तर जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर आकाश छिकारा ने सार्वजनिक और निजी संपत्तियों की सुरक्षा हेतु सख्त दंडात्मक आदेश जारी किए हैं। आगामी 11 मई से नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसके बाद जून के प्रथम सप्ताह में मतदान और मतगणना संपन्न कराई जाएगी।
इस चुनावी प्रक्रिया के दौरान संपत्तियों को विरूपित होने से बचाने के लिए छत्तीसगढ़ संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम 1994 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एक विशेष कार्ययोजना लागू की गई है। कलेक्टर के आदेशानुसार किसी भी शासकीय या अशासकीय भवन, बिजली के खंभों, टेलीफोन के टावरों या अन्य सार्वजनिक ढांचों पर बिना अनुमति के नारे लिखना, पोस्टर चिपकाना या झंडे लगाना अब एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा। यदि कोई व्यक्ति या राजनीतिक दल इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और संबंधित अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए प्रशासन ने संबंधित थाना क्षेत्र में एक लोक संपत्ति सुरक्षा दस्ता तैनात किया है। यह दस्ता सीधे संबंधित थाना प्रभारी के मार्गदर्शन में कार्य करेगा और क्षेत्र का निरंतर भ्रमण कर यह सुनिश्चित करेगा कि कहीं भी आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन न हो। इस दस्ते को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर पाए जाने वाले किसी भी अवैध प्रचार साहित्य, बैनर या कट-आउट्स को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए और इस पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई जाए ताकि साक्ष्यों के साथ पारदर्शिता बनी रहे।
वहीं निजी संपत्तियों के उपयोग को लेकर भी प्रशासन ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिसके तहत कोई भी प्रत्याशी या राजनीतिक दल किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए तभी कर पाएगा, जब उसके पास संपत्ति स्वामी की स्पष्ट लिखित सहमति होगी। बिना लिखित अनुमति के निजी मकानों पर झंडे या पोस्टर लगाना विरूपण माना जाएगा और शिकायत मिलने पर पुलिस द्वारा त्वरित जांच कर सक्षम न्यायालय में चालान पेश किया जाएगा।
जारी इस आदेश के अनुसार, निर्वाचन प्रक्रिया को पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से बस्तर की सीमा के भीतर तीव्र संगीत, ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित उपयोग और किसी भी प्रकार के अत्यधिक शोर को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसीलिए छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम 1985 की धारा 10 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए अब तीव्र आवाजों, मोटर वाहनों के प्रेशर हॉर्न और मशीनों से होने वाले शोर पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
हालांकि निर्वाचन प्रचार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कुछ शर्तों के साथ अनुमति हेतु प्रावधान किया गया है। जिसके तहत चुनावी प्रचार के लिए ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग केवल कम आवाज में सुबह 6 बजे से लेकर रात 10 बजे तक ही किया जा सकेगा।
यदि कोई प्रत्याशी या संगठन चलते हुए वाहन पर लाउडस्पीकर का उपयोग करना चाहता है, तो उसे संबंधित अनुविभागीय अधिकारी या कार्यपालिक मजिस्ट्रेट से विधिवत अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यदि कोई भी व्यक्ति या समूह इन नियमों की अवहेलना करता पाया जाता है, तो संबंधित ध्वनि विस्तारक यंत्रों को तत्काल जब्त करने की कार्यवाही की जाएगी। यह प्रतिबंध उन लोगों पर लागू नहीं होगा जिन्हें विधि द्वारा विशेष छूट प्रदान की गई है।