
Chhattisgarh Bastar Travelling : बस्तर में एक दर्जन से अधिक गुफाएं हैं। जिसको देखने के लिए देश विदेश से लोग पहुंचते हैं। लेकिन इस गुफाओं की खोज के लिए विशेष तैयारी रखनी होती है। जिसके लिए शुक्रवार को कोटमसर गांव में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। रोजगार समेत अन्य दृष्टि से यहां बड़ी संख्या में लोग कार्यशाला में लोग पहुंचे।
गुफा की खोज और इस दौरान सुरक्षा कैसे रखें, दी गई जानकारी: कार्यशाला में जयंत विश्वास के द्वारा गुफा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई साथ ही उन्होंने गुफा की खोज कैसे की जाती है और गुफाओं के सर्वे के वक्त दुर्घटना से बचने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इस संबध में बताया गया।
गुफाओं के सर्वे के समय गुफाओं को हानी ना पहुंचाते हुए इसका अध्ययन किस रूप से कैसे कर सकते हैं इस संबंध में विस्तृत रूप से प्रेजेंटेशन और गुफा ले जाकर फील्ड में जानकारी दी। इसके अलावा पर्यटकों को भूगर्भीय अध्ययन के दृष्टिकोण से उनकी महत्वता को कैसे अर्जित कराया जाता है यह भी बताया गया।
15 से अधिक गुफाएं हैं बस्तर में
मालूम हो कि कांकेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान भूमिगत लाइमस्टोन गुफाओं के लिए प्रसिद्ध है यहां कुटुमसर गुफा ,कैलाश गुफा जैसे 15 से अधिक गुफाएं हैं जो राष्ट्रीय उद्यान की सुंदरता को बढ़ाती है। दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार को कोटमसर गांव में नेशनल केव रिसर्च एंड प्रोटक्शन ऑर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर किया गया।
50 से अधिक प्रतिभागी हुये सम्मिलित
इस कार्यशाला में डॉ जयंत विश्वास, राजन विश्वनाथ विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे। प्रतिभागियों में राष्ट्रीय उद्यान के नेचर गाइड, यूनिवर्सिटी के स्कॉलर और विभागीय कर्मचारी शामिल थे। पार्क निदेशक धम्मशील गणवीर ने बताया कि इस कार्यशाला से गुफाओं के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रबंधन के लिए पार्क को सहायता मिलेंगी। साथ ही स्थानीय नेचर गाइड़ को इको टूरिज्म के माध्यम से गुफाओं की वैज्ञानिक जानकारी पर्यटकों तक पहुंचाने के लिए मदद मिलेगी।