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फेंके नहीं, कमाई में बदलेंगे कपड़ों के टुकड़े… कोंडागांव में अब गारमेंट फैक्ट्री के वेस्ट से शुरू होगा नया कारोबार

Textile Waste Recycling: जगदलपुर में गारमेंट फैक्ट्री के वेस्ट मटेरियल से गद्दे और तकिए बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। कलेक्टर नुपूर राशि पन्ना ने कॉटन गद्दा निर्माण इकाई का निरीक्षण कर महिलाओं और युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए।
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Garment Factory Waste Recycling

Garment Factory Waste Recycling: गद्दा निर्माण यूनिट में महिलाओं को मिलेगा रोजगार (photo source- AI)

Garment Factory Waste Recycling: जिस कपड़े के बचे हुए टुकड़ों को अब तक फैक्ट्री का बेकार वेस्ट समझा जाता था, वही अब महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार का नया जरिया बनने जा रहा है। गारमेंट फैक्ट्री की सफलता के बाद अब प्रशासन ने एक और पहल शुरू की है। कोंडानार गारमेंट फैक्ट्री से निकलने वाले कपड़ों के वेस्ट मटेरियल से गद्दे और तकिए तैयार किए जाएंगे। इसके लिए कॉटन गद्दा निर्माण इकाई स्थापित करने की तैयारी तेज कर दी गई है। इस पहल का उद्देश्य सिर्फ वेस्ट मटेरियल का उपयोग करना नहीं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें स्थायी रोजगार से जोड़ना भी है।

Youth Employment Bastar: कलेक्टर ने तैयारियों का लिया जायजा

कलेक्टर नुपूर राशि पन्ना ने बुधवार को बड़ेकनेरा रोड स्थित प्रस्तावित कॉटन गद्दा निर्माण इकाई का निरीक्षण किया। उन्होंने वहां चल रही प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी ली और अधिकारियों को निर्देश दिए कि गद्दे एवं तकिए के निर्माण के लिए आवश्यक मशीनें समय पर उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यस्थल को इस तरह विकसित किया जाए, जहां प्रशिक्षण और उत्पादन दोनों व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकें।

बैच बनाकर मिलेगा प्रशिक्षण

प्रशासन का फोकस केवल यूनिट शुरू करने पर नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के लिए तैयार करने पर भी है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि महिलाओं और युवाओं के अलग-अलग बैच बनाकर उन्हें चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाए। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें इसी यूनिट में रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है। इसके साथ ही बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए उत्पादन की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि तैयार उत्पादों की बिक्री में किसी तरह की समस्या न आए।

वेस्ट नहीं, अब बनेगा 'वेल्थ'

इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें गारमेंट फैक्ट्री से निकलने वाले कपड़ों के छोटे-छोटे टुकड़ों का उपयोग किया जाएगा। सामान्यतः यह सामग्री बेकार मानी जाती है या कम कीमत पर बेच दी जाती है। अब यही वेस्ट मटेरियल गद्दों और तकियों की फिलिंग के रूप में इस्तेमाल होगा। इससे एक ओर फैक्ट्री का कचरा कम होगा, वहीं दूसरी ओर कम लागत में उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।
यह पहल 'वेस्ट टू वेल्थ' यानी कचरे को कमाई में बदलने की अवधारणा का एक व्यावहारिक उदाहरण भी मानी जा रही है।

महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का अवसर

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की कई महिलाएं आज भी नियमित रोजगार की तलाश में हैं। यह यूनिट उनके लिए एक बड़ा अवसर बन सकती है। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं न केवल गद्दे और तकिए बनाने का हुनर सीखेंगी, बल्कि गुणवत्ता, पैकिंग और उत्पादन प्रबंधन की जानकारी भी प्राप्त करेंगी। इससे उनके लिए भविष्य में स्वरोजगार के रास्ते भी खुल सकते हैं।

स्थानीय युवाओं को भी मिलेगा लाभ

इस पहल का लाभ केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय युवाओं को भी प्रशिक्षण देकर उत्पादन प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा। इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बाहर काम की तलाश में जाने वाले युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी।

Mattress Manufacturing Unit: मल्टीयूटिलिटी सेंटर का भी किया निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने एनसीसी मैदान के पास निर्माणाधीन मल्टीयूटिलिटी सेंटर का भी जायजा लिया। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि सामुदायिक उपयोग की ये सुविधाएं भविष्य में स्थानीय लोगों के लिए कई तरह की सेवाओं का केंद्र बनेंगी।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की छोटी औद्योगिक इकाइयां स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। जब स्थानीय संसाधनों का उपयोग स्थानीय स्तर पर ही उत्पादन के लिए किया जाता है, तो रोजगार बढ़ता है, आय में वृद्धि होती है और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है।

इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी यह पहल महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कपड़ों के वेस्ट का बेहतर उपयोग होगा और अनावश्यक कचरा कम होगा। राज्य सरकार लगातार महिलाओं और युवाओं को कौशल आधारित रोजगार से जोड़ने पर जोर दे रही है। गारमेंट फैक्ट्री के बाद कॉटन गद्दा निर्माण इकाई इसी दिशा में अगला कदम माना जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य जिलों में भी इसी तरह की इकाइयां स्थापित की जा सकती हैं।