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Jhiram Case: 26/11 मुंबई हमले की पैटर्न पर झीरम कांड, एनआईए कोर्ट ने कसाब केस को माना नजीर

Jhiram Case Verdict: झीरम घाटी कांड में एनआईए कोर्ट ने 26/11 मुंबई हमले और कसाब केस का जिक्र करते हुए इसे नजीर माना। जानिए झीरम मामले के फैसले में कोर्ट ने क्या कहा।
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Jhiram Case

26/11 मुंबई हमले की पैटर्न पर झीरम कांड (Patrika Create)

Jhiram Ghati Case: मुंबई के 26/11 हमले के दोषी आतंकी अजमल आमिर कसाब के मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने सिर्फ यह सवाल नहीं था कि कितने लोगों की जान गई, बल्कि यह भी देखा गया था कि हमले की तैयारी किस स्तर की थी, किस तरह के घातक हथियारों और विस्फोटकों से घटना की गई। अपराध की प्रकृति और उसकी भयावहता के साथ वहां की परिस्थितियों को परखा गया। जगदलपुर में एनआईए की विशेष अदालत ने 16 सितंबर को झीरम मामले में सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इसके बाद फैसले में यह बात सामने आई कि कोर्ट ने कसाब केस और मुंबई हमले को भी नजीर मानते हुए सजा का निर्धारण किया। ऐसा इसलिए क्योंकि मुंबई हमले और झीरम के हमले का पैटर्न लगभग एक जैसा ही था।

जवानों से बड़ी संख्या में हथियार लूटे गए

झीरम मामले के आदेश में दर्ज घटनाक्रम के अनुसार हमले के दौरान नेताओं की सुरक्षा में तैनात जवानों से बड़ी संख्या में हथियार लूटे गए। कसाब मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मृत्युदंड पर विचार करते समय हमले की व्यापकता, बड़ी संख्या में लोगों की हत्या और घायल होने, घातक हथियारों एवं विस्फोटकों के इस्तेमाल और अपराध की क्रूरता जैसे पहलुओं को देखा था। साथ ही अदालत ने मृत्युदंड के मामलों में आरोपी की व्यक्तिगत परिस्थितियों और सुधार की संभावना जैसे शमनकारी पहलुओं पर विचार की आवश्यकता भी बताई थी। झीरम मामले में सजा पर बहस के दौरान भी यही बिंदु अलग-अलग रूप में सामने आए। अभियोजन ने हमले के सामूहिक स्वरूप और सभी को निशाना बनाए जाने की मंशा पर जोर दिया। बचाव पक्ष ने इसके विपरीत प्रत्येक दोषी की अलग-अलग भूमिका, 13 साल की हिरासत और अन्य परिस्थितियों को देखते हुए कम सजा की मांग की।

झीरम हमले में नक्सलियों ने जवानों के लुटे हथियार

  • 9 — एके-47
  • 7 — इंसास
  • 4 — 9 एमएम पिस्टल
  • 2 — एसएलआर
  • 22 — कुल लूटे गए हथियार
  • 206 — वाहनों पर मिले गोलियों के निशान

सरेंडर करने वाले बड़े नक्सलियों की बढ़ी टेंशन… कई अंडरग्राउंड!

हमले में अहम भूमिका निभाने वाले देवजी, बारसे देवा और सुरेंद्र को फैसले की ‘आंच’ खुद तक पहुंचने का डर

  • 10 को फांसी की सजा देने के बाद कोर्ट ने 27 को फरार बताया, इनमें कई सरेंडर कर चुके

झीरम घाटी हमले में 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद इसका असर अब उन नक्सली नेताओं तक भी पहुंचता दिखाई दे रहा है, जिनकी घटना में अहम भूमिका थी और बाद में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक ऐसे नेताओं में अब इस बात को लेकर चिंता बढ़ी है कि यदि झीरम मामले की जांच या न्यायिक कार्रवाई की आंच भविष्य में उन तक पहुंचती है तो उन्हें भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल कोर्ट ने जब 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई तो उसके बाद सामने आए फैसले की कॉपी में 27 नक्सलियों को फरार बताया गया है।

सरेंडर नीति के तहत मुख्यधारा में लौटे

इनमें ज्यादातर नक्सली इस वक्त छत्तीसगढ़ समेत आंध्र, तेलंगाना और मध्यप्रदेश में सरेंडर नीति के तहत मुख्यधारा में लौटे हैं। सुरेंदर, बारसे देवा और देवजी जैसे बड़े नक्सली नेताओं के भूमिगत होने की चर्चा है। सूत्रों का कहना है कि झीरम फैसले के बाद इन नेताओं की गतिविधियां सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आ रही हैं और वे अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं। हालांकि पुलिस या सरकार की ओर से इन नेताओं के भूमिगत होने अथवा उनके खिलाफ किसी नई कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इनके भूमिगत होने की जानकारी को फिलहाल सूत्रों के दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।

समर्पण के बाद बदली थी भूमिका

आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत ऐसे लोगों को हिंसा का रास्ता छोडक़र मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया गया है। अब झीरम मामले में आए मृत्युदंड के फैसले के बाद यह सवाल भी चर्चा में है कि भविष्य में जांच का दायरा उन लोगों तक पहुंचता है या नहीं, जिनकी घटना के समय संगठन में भूमिका रही थी लेकिन वे बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं।