जगदलपुर

स्वाद ने दिलाई पहचान! बस्तर का काजू अब देश-विदेश तक पहुंचा, बढ़ती मांग से किसानों को फायदा

Bastar Agriculture: छत्तीसगढ़ के बस्तर में काजू की खेती तेजी से बढ़ रही है। हर साल 50 हजार क्विंटल से अधिक उत्पादन के साथ करीब 10 हजार परिवारों को रोजगार मिल रहा है।
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Updated: 26 Apr 2026, 11:30 AM IST
बस्तर में फल-फूल रहा काजू व्यापार (photo source- Patrika)
बस्तर में फल-फूल रहा काजू व्यापार (photo source- Patrika)

Bastar Agriculture: बस्तर में काजू की खेती और व्यापार तेजी से फल-फूल रहा है। अनुकूल जलवायु और उपजाऊ मिट्टी के कारण यहां काजू का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि इन दिनों शहर के चौक-चौराहों और सड़कों पर स्थानीय काजू की बिक्री आम हो गई है। बस्तर के काजू अब छत्तीसगढ़ से निकलकर देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचने लगे हैं। वनोपज पर निर्भर रहने वाले आदिवासी अब काजू की खेती से भी अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं।

जिले के बकावंड ब्लॉक में बड़े पैमाने पर काजू का उत्पादन किया जा रहा है। वर्तमान में बस्तर में प्रतिवर्ष 50 हजार क्विंटल से अधिक काजू का उत्पादन हो रहा है, जिससे करीब 10 हजार परिवार सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं और आर्थिक रूप से लाभान्वित हो रहे हैं।

Bastar Agriculture: 4-5 वर्षों में तैयार होता है पेड़

काजू उत्पादक विजय सेठिया के अनुसार काजू का पेड़ लगभग चार से पांच वर्षों में तैयार होकर फल देने लगता है। बस्तर की जलवायु इसके लिए बेहद अनुकूल है, जिससे किसान बड़ी संख्या में काजू का प्लांटेशन कर रहे हैं। पेड़ तैयार होने के बाद इसकी देखभाल में बहुत कम खर्च आता है। ग्राम पंडेनार के सरपंच विपत सिंह का कहना है कि यदि सरकार किसानों को और प्रोत्साहन दे, तो निजी भूमि में भी काजू की खेती का विस्तार तेजी से हो सकता है।

किसानों को मिल रहा प्रोत्साहन

काजू की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए वन विभाग और उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को प्लांटेशन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मनरेगा के तहत भी काजू के पौधे लगाए जा रहे हैं, जिससे खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

ठोस और स्वादिष्ट काजू की बढ़ी मांग

बस्तर का काजू अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए विशेष पहचान बना रहा है। बिना पॉलिश के प्राकृतिक रूप में मिलने वाला यह काजू बाजार में उपलब्ध अन्य राज्यों के काजू की तुलना में अधिक स्वादिष्ट और ठोस माना जाता है। यही कारण है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। कच्चा काजू 120 से 150 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा जाता है, जबकि प्रोसेसिंग के बाद यही काजू 500 से 600 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है।

Bastar Agriculture: प्रोसेसिंग यूनिट और महिलाओं को रोजगार

बकावंड ब्लॉक में स्थापित प्रोसेसिंग यूनिट में स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा काजू की प्रोसेसिंग की जा रही है। ‘बस्तर काजू’ के नाम से पैकेजिंग कर इसे बाजार में उतारा जा रहा है। इससे महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

बस्तर का काजू अन्य राज्यों की तुलना में स्वाद में बेहतर है। इसके ठोस और स्वादिष्ट होने के कारण लोगों की मांग तेजी से बढ़ रही है। प्रतिदिन एक क्विंटल से अधिक काजू की खपत हो रही है: के. वेंकटेश, काजू व्यापारी

Updated on:
26 Apr 2026, 11:30 AM IST
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