
तेलंगाना के रेत ठेकेदार हुए सक्रिय (photo source- Patrika)
CG Mining Mafia: बस्तर में अब दो तरह के नए बस्तर नजर आ रहे हैं। एक ओर जहां खुशहाली का विस्तार हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर माफिया राज को बढ़ावा मिलता दिख रहा है। बस्तर के खनिज संपदा में सेंध लगाने के लिए अब बाहरी राज्यों के माफिया सक्रिय होने लगे हैं। नक्सलवाद का असर कम होते ही अब जिले में रेत माफिया बेखौफ काम कर रहे हैं। उनके सामने सारे नियम-कायदे बौने नजर आ रहे हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी की गाइड लाइन कहती है कि किसी भी तरह से रेत खनन के लिए नदी के प्रवाह को प्रभावित नहीं किया जा सकता है लेकिन जिले में रेत माफिया इतने बेखौफ हो चुके है कि उनके सामने ऐसे सारे नियम सिर्फ कागजी नजर आ रहे हैं। भोपालपटनम ब्लॉक के अटटूकपल्ली पंचायत अंतर्गत कोंडामौसम गांव में इंद्रावती नदी के भीतर ही करीब 200 मीटर लंबी सड$क बनाकर अवैध रेत तस्करी का रास्ता तैयार कर दिया गया है।
हैरानी की बात यह है कि यह पूरा निर्माण बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के किया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक नदी के बीच मुरूम और रेत डालकर सड़क बनाई गई है, साथ ही पाइप पुलिया डालकर नदी का पानी दूसरी ओर मोड़ दिया गया है, जिससे तस्करों को रेत निकालने और वाहनों की आवाजाही में आसानी हो सके। इस पूरे मामले में तेलंगाना के ठेकेदारों की सक्रिय भूमिका सामने आ रही है।
ग्रामीणों ने पंचायत सचिव रवि दुर्गम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पहले भी तालाब निर्माण में भ्रष्टाचार और गबन के आरोप लग चुके हैं, और अब इस अवैध सड$क निर्माण में उनकी भूमिका सामने आ रही है।
कोंडामौसम रेत खदान पंचायत को स्वीकृत जरूर है, लेकिन उसकी प्रक्रिया अभी कागजों में ही चल रही है। इसके बावजूद नदी में सड़क बनाकर पहले ही तस्करी शुरू कर दी गई है, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गांव के लोगों का आरोप है कि सरपंच और सचिव की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। बिना ग्रामसभा की अनुमति और बिना ग्रामीणों को जानकारी दिए सड़क निर्माण कर दिया गया। ग्रामीण मोडेम गणपत पंच ने बताया कि सिर्फ नारियल फोड़कर काम शुरू कर दिया गया, हमें कोई जानकारी नहीं दी गई।
विरोध करने पर भी अनसुना किया गया। वहीं ग्रामीण तलाड़ी इरैया ने कहा कि गांव में इस विषय पर कोई बैठक नहीं हुई, किसकी अनुमति से सड$क बनी यह हमें नहीं पता। जानकारी के अनुसार यालम शिवेया, दूबा तुलसीराम और दूबा नागेय की जमीन से होकर सड$क बनाई गई है। जमीन मालिकों को इस कार्य की पूर्व सूचना तक नहीं दी गई।
इंद्रावती नदी में पानी का प्रवाह रोककर पाइप के जरिए दिशा बदलना गंभीर पर्यावरणीय खतरा माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप और जलस्तर पर असर पड़ सकता है। एनजीटी के नियम में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि नदी के प्रवाह को प्रभावित नहीं किया जा सकता है लेकिन यह काम भी किया जा रहा है। यह सारा अवैध काम तब हो रहा है जब जिले को नक्सल मुक्त बताते हुए उत्सव मनाया जा रहा है।
इस पूरे मामले की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। सरपंच और सचिव अचानक पहुंचे और नारियल फोडक़र सडक़ निर्माण कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों को बिना जानकारी दिए यह काम किए जाने पर उन्होंने विरोध भी जताया। आशंका जताई कि रेत को देपाल में डंप कर तेलंगाना ले जाने की योजना बनाई जा रही है— मोडेम गणपत, पंच
इस विषय को लेकर अब तक गांव में कोई बैठक आयोजित नहीं की गई है। सडक़ निर्माण किसकी अनुमति से किया गया, इसकी स्पष्ट जानकारी ग्रामीणों को नहीं दी गई है। निर्माण कार्य के चलते नदी के पानी के प्रवाह को रोका जा रहा हैं— तलाडी इरैया, ग्रामीण
आपके माध्यम से यह जानकारी मिल रही है। मैं अफसरों से कहकर जांच करवाता हूं। नियम तोडऩे वालों पर कार्रवाई होगी— संबित मिश्रा, कलेक्टर बीजापुर
Updated on:
25 Apr 2026 12:58 pm
Published on:
25 Apr 2026 12:57 pm
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